Jashpur's Mahua to Change the LandscapeJashpur's Mahua to Change the Landscape
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रायपुर, 22 सितंबर 2026/ ETrendingIndia / जशपुर का पारंपरिक महुआ अब केवल जंगलों में मिलने वाली वन उपज नहीं रह गया है। ‘जशप्योर’ और ‘जय जंगल’ के प्रयासों से महुआ को आधुनिक खाद्य उत्पादों में बदलकर बाजार से जोड़ा जा रहा है।

इससे जनजातीय परिवारों और महिला समूहों के लिए रोजगार की नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं।

महुआ के आधुनिक उत्पाद

रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में 18 से 20 सितंबर तक आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशपुर के महुआ उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे।

स्टॉल पर महुआ नेक्टर, नेक्टर गोल्ड, वन्यप्राश, महुआ एनर्जी पाचक, महुआ टी, कुकीज़, रागी-महुआ उत्पाद, लड्डू और फूड-ग्रेड महुआ फूल प्रदर्शित किए गए।

पेड़ से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन
महुआ के स्वच्छ संग्रहण, फूड-ग्रेड तैयार करने, डिहाइड्रेशन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर काम किया जा रहा है।

जिला प्रशासन के सहयोग से Mahua Centre of Excellence और ‘Mahua Kosh’ में महुआ के नए खाद्य उपयोग और प्रसंस्करण तकनीकों पर अनुसंधान भी किया जा रहा है।

परंपरा और तकनीक का संगम

मेले में जशपुर की अनेश्वरी भगत और गणपति बाई ने उत्पादों की जानकारी के साथ महुआ संग्रहण और फूड-ग्रेड बनाने की प्रक्रिया भी बताई। इससे पारंपरिक जनजातीय ज्ञान को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ने की तस्वीर सामने आई।

पोषण पर भी हो रहा अनुसंधान

‘जय जंगल’ के निदेशक समर्थ जैन के अनुसार, महुआ सेवन के बाद आयरन और हीमोग्लोबिन से जुड़े सकारात्मक अनुभवों की बातें सामने आई हैं। इन दावों को वैज्ञानिक रूप से जांचने और महुआ में मौजूद आयरन की शरीर में उपलब्धता का अध्ययन करने पर आगे काम किया जा रहा है।

जशपुर से देश-दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी

महुआ के मूल्य संवर्धन की यह पहल स्थानीय संसाधन, जनजातीय परंपरा, महिला समूहों, प्रशासनिक सहयोग और उद्यमिता को एक साथ जोड़ रही है। इससे जंगलों की पारंपरिक उपज को बेहतर बाजार मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए आय के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।


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