Share This Article नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026। Diamond Price : प्राकृतिक हीरों की कीमतें दो दशकों से अधिक समय में अपने निचले स्तरों में पहुंच गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार थोक बाजार में प्राकृतिक हीरों के दाम 2021 की तुलना में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक कम हुए हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हीरे की अंगूठी, हार या अन्य आभूषण भी इसी अनुपात में सस्ते हो गए हैं। तैयार आभूषण की कीमत में हीरे के साथ सोना या अन्य धातु, डिजाइन, निर्माण शुल्क और दूसरी लागत भी शामिल होती है। Diamond Price में गिरावट की बड़ी वजह क्या है? प्राकृतिक हीरों की कीमतों पर कमजोर मांग, बढ़ता स्टॉक और लैब में तैयार होने वाले अपेक्षाकृत सस्ते हीरों की बढ़ती उपलब्धता का दबाव है। खास तौर पर छोटे आकार और कम गुणवत्ता वाले प्राकृतिक हीरों की मांग पर लैब-निर्मित हीरों का असर अधिक दिखाई दे रहा है। कम कीमत वाले विकल्प मिलने से इस श्रेणी के प्राकृतिक हीरों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। De Beers के कच्चे हीरों की कीमत 32% घटी अग्रणी हीरा कंपनी De Beers के अनुसार 2026 की पहली छमाही में उसके कच्चे हीरों की औसत कीमत सालाना आधार पर 32 प्रतिशत घटकर 105 डॉलर प्रति कैरेट रह गई। बाजार में छोटे और कम गुणवत्ता वाले प्राकृतिक हीरों की मांग कमजोर रहने से इस श्रेणी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, सभी आकार और गुणवत्ता वाले हीरों की स्थिति एक जैसी नहीं है। हीरा सस्ता फिर भी ज्वेलरी की कीमत क्यों ज्यादा? प्राकृतिक हीरे की थोक कीमत कम होने से ग्राहकों के लिए हीरे की खरीद कुछ सस्ती हो सकती है, लेकिन तैयार आभूषण की कुल कीमत पर इसका असर सीमित रह सकता है। इसकी वजह यह है कि ज्वेलरी में हीरे के अलावा सोना या प्लैटिनम, डिजाइन, मेकिंग चार्ज और अन्य लागत भी जुड़ी होती है। विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार 2026 की दूसरी तिमाही में भारत में सोने की कीमत एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 59 प्रतिशत अधिक थी। ऐसे में हीरे की कीमत में गिरावट के बावजूद सोने की ऊंची कीमत आभूषण की अंतिम कीमत को प्रभावित कर रही है। Lab-Grown Diamond ने बढ़ाई Natural Diamond की चुनौती लैब-निर्मित हीरे प्राकृतिक हीरों की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध होने के कारण बाजार में तेजी से प्रतिस्पर्धा बढ़ा रहे हैं। इसका असर विशेष रूप से छोटे और कम गुणवत्ता वाले प्राकृतिक हीरों पर अधिक दिखाई दे रहा है। वहीं बड़े आकार और उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक हीरों की स्थिति अलग है। दुर्लभता और गुणवत्ता के कारण इस श्रेणी की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। भारत के Diamond Industry पर भी पड़ा असर भारत प्राकृतिक हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग का दुनिया के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। इसलिए वैश्विक मांग और कीमतों में बदलाव का असर भारतीय हीरा उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से कटे और पॉलिश किए गए हीरों का निर्यात 8.52 प्रतिशत घटकर 12.16 अरब डॉलर रह गया। कमजोर वैश्विक मांग और प्राकृतिक हीरों की कीमतों पर दबाव को इसके प्रमुख कारणों में देखा जा रहा है। Share This Article Post navigation एफडीआई के अगले चरण में सिर्फ निवेश नहीं, मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम पर होना चाहिए फोकस : एसोचैम MP Development News : CM मोहन यादव बोले- दो अंकों में पहुंची मध्यप्रदेश की विकास दर, निवेश और रोजगार में तेजी, 2047 तक प्रति व्यक्ति आय का बड़ा लक्ष्य