Share This Article देश में हाई-स्पीड और एक्सेस-कंट्रोल राष्ट्रीय राजमार्गों को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने नए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका फोकस बेहतर प्लानिंग, आधुनिक तकनीक, सुगम टोल, प्रभावी जल निकासी और हरित गलियारों पर है। भविष्य के ट्रैफिक को ध्यान में रखकर प्लानिंग नए हाईवे की योजना बनाते समय मौजूदा और वैकल्पिक मार्गों के ट्रैफिक के साथ भविष्य में बढ़ने वाली यात्री और माल ढुलाई की जरूरतों का आकलन किया जाएगा। इसके लिए टोल और अन्य विश्वसनीय आंकड़ों का इस्तेमाल होगा। निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हाईवे निर्माण में गुणवत्ता और निगरानी बेहतर करने के लिए ऑटोमेटेड और इंटेलिजेंट मशीन-सहायता प्राप्त निर्माण तकनीक (AI-MC) को बढ़ावा दिया जाएगा। टोल व्यवस्था होगी और आसान हाई-स्पीड कॉरिडोर पर पारंपरिक टोल व्यवस्था से आगे बढ़कर मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) प्रणाली लागू करने की दिशा में जरूरी प्रावधान किए जाएंगे। हाईवे के साथ बढ़ेगी हरियाली लूप, फ्लाईओवर के नीचे, डिवाइडर और अन्य उपयुक्त स्थानों पर लैंडस्केपिंग और पौधारोपण को परियोजना की योजना का हिस्सा बनाया जाएगा। डिवाइडर में पौधों की सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन की व्यवस्था भी की जाएगी। जलभराव रोकने पर विशेष जोर DPR में विस्तृत ड्रेनेज प्लान अनिवार्य रूप से शामिल होगा। बारिश के पानी की सुरक्षित निकासी के साथ जरूरत वाले स्थानों पर वॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे। अंडरपास, फ्लाईओवर और डिवाइडर के आसपास जलभराव रोकने के लिए विशेष व्यवस्था होगी। किन हाईवे पर लागू होंगे नियम? ये दिशा-निर्देश आने वाले चार और छह लेन वाले ग्रीनफील्ड तथा ब्राउनफील्ड हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू होंगे। इससे देश में भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सुरक्षित, टिकाऊ और तकनीक आधारित हाईवे नेटवर्क विकसित करने में मदद मिलेगी। Share This Article Post navigation INS त्रिशूल… द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘वरुण’ के 24वें संस्करण के लिए फ्रांस के टूलॉन पहुंचा CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम…! CJP ने दी राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी