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रायपुर, 29 सितंबर 2026 / ETrendingIndia / बांग्लादेश एक बार फिर पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान ने उसको करारा झटका दिया है। पाकिस्तान ने बांग्लादेश के रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए यूरेनियम की खेप ले जा रहे एक रूसी विमान को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से मना कर दिया। बांग्लादेश के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र की यूनिट-2 के लिए परमाणु ईंधन की पहली खेप 24 सितंबर को पहुंचने वाली थी। हालांकि, अब डिलीवरी स्थगित है।


रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने बांग्लादेश को ऐसे समय पर झटका दिया है, जब वह गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है और यह ईंधन के रूपपुर में बिजली उत्पन्न करने के लिए भेजा जाना थआ।


बांग्लादेश के गांवों में प्रतिदिन 10 से 16 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। ईंधन की आवक में देरी से बिजली उत्पादन शुरू होने में भी देरी हो सकती है, जिससे देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर असर पड़ सकता है।


रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम रूपपुर संयंत्र का निर्माण और ईंधन की आपूर्ति कर रही है। यूनिट-2 के लिए ईंधन की पहली खेप लेकर रूसी विमान अजरबैजान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और भारत होते हुए ढाका पहुंचने वाला था।


बांग्लादेश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनम ने पुष्टि की रूसी विमान को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं मिली है और न कोई कारण बताया।


रोसाटॉम ने अब ईंधन आपूर्ति अक्टूबर में करेगा। बांग्लादेश ने बिजली की गंभीर समस्या के बीच 2011 में रूस से समझौता किया था, जिसके तहत ढाका से 160 किलोमीटर दूर पद्मा नदी के किनारे रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र बन रहा है।


यह देश का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। इसकी लागत 12.65 अरब डॉलर (करीब 1.21 लाख करोड़ रुपये) है। निर्माण 2017 में शुरू हुआ और बिजली उत्पादन दिसंबर में होने की उम्मीद है। कोरोना और यूक्रेन युद्ध के कारण परियोजना में 2 साल की देरी हुई है।
ढाका स्थित पाकिस्तान उच्चायोग ने मंगलवार को जारी एक स्पष्टीकरण में कहा कि इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय राजनयिक मानदंडों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता रखता है और बांग्लादेश के साथ संबंधों को महत्व देता है।


उसने कहा कि उड़ान प्रतिबंधित करने से जुड़ी जो रिपोर्ट आ रही है, वह तकनीकी और प्रक्रियात्मक व्यवस्थाओं से जुड़ी प्रतीत होती है।
उच्चायोग ने रिपोर्टों को गलत बताते हुए ढाका से उसे महत्व न देने और मामले को केवल तकनीकी संदर्भ में देखने का आग्रह किया है।


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