International Day of Older PersonsInternational Day of Older Persons
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रायपुर , 01अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस 2026 हर साल की तरह 1 अक्टूबर को मनाया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र ने 14 दिसंबर 1990 को 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस घोषित किया था। वर्ष 2026 की थीम “The Age of Longevity: Rethinking Systems for Longer Lives” है।

इसका अर्थ है कि लंबी होती जिंदगी के साथ स्वास्थ्य, पेंशन, रोजगार, आवास, देखभाल और सामाजिक भागीदारी की व्यवस्थाओं पर नए सिरे से विचार करना होगा। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2050 तक 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की वैश्विक संख्या 2.1 अरब तक पहुंचने का अनुमान है।

बढ़ती उम्र के साथ बदल रही बुजुर्गों की जरूरत

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस 2026 ऐसे समय में मनाया जा रहा है, जब बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण और चिकित्सा तकनीक ने जीवन प्रत्याशा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हालांकि, लंबी उम्र के साथ स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक जुड़ाव की जरूरत भी बढ़ती है। इसलिए बुजुर्गों को केवल देखभाल पाने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव और ज्ञान की महत्वपूर्ण पूंजी के रूप में देखना जरूरी है।

भारत में तेजी से बढ़ रही वृद्ध आबादी

भारत में भी आने वाले वर्षों में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है। UNFPA के अनुसार, 2022 में भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के करीब 15.3 करोड़ लोग थे। यह संख्या 2050 तक लगभग 34.7 करोड़ हो सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस 2026 इस बदलाव पर व्यापक चर्चा का अवसर देता है। बढ़ती वृद्ध आबादी का असर स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा, आवास, सार्वजनिक परिवहन और दीर्घकालिक देखभाल जैसी व्यवस्थाओं पर पड़ेगा।

आर्थिक सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

बुजुर्गों के सम्मानजनक जीवन के लिए केवल भावनात्मक अपनत्व पर्याप्त नहीं है। आर्थिक सुरक्षा भी इसका महत्वपूर्ण आधार है। UNFPA की India Ageing Report 2023 के अनुसार, 40 प्रतिशत से अधिक बुजुर्ग सबसे निचले संपत्ति वर्ग में आते हैं और करीब 18.7 प्रतिशत बुजुर्गों के पास कोई आय नहीं है।

इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। अकेलापन, परिवार से दूरी और सामाजिक गतिविधियों में कमी बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सामुदायिक गतिविधियां, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और सामाजिक भागीदारी के अवसर भी महत्वपूर्ण हैं।

डिजिटल दौर में बुजुर्गों को साथ लेकर चलना जरूरी

डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल ने बुजुर्गों के सामने नई चुनौतियां भी पैदा की हैं। बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाएं, टिकट बुकिंग और सरकारी सुविधाएं तेजी से ऑनलाइन हो रही हैं।

ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस 2026 डिजिटल समावेशन की जरूरत को भी रेखांकित करता है। युवा पीढ़ी बुजुर्गों को स्मार्टफोन, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल सिखाकर पीढ़ियों के बीच दूरी कम कर सकती है।

सम्मान को केवल एक दिन तक सीमित न रखें

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस का उद्देश्य केवल एक दिन बुजुर्गों को शुभकामनाएं देना नहीं है। परिवार और समाज में उनकी बात सुनना, निर्णयों में उन्हें शामिल करना और उनकी जरूरतों को समझना भी उतना ही जरूरी है।


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