PM Modi PM Modi
Share This Article

रायपुर , 01अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि UPSC के 100 वर्ष केवल एक संस्था की यात्रा नहीं, बल्कि लाखों युवाओं की आकांक्षाओं और देशवासियों के विश्वास का उत्सव है।

प्रधानमंत्री ने भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया में बदलाव, जनसेवा की भावना और तकनीकी चुनौतियों से निपटने की क्षमता पर जोर दिया।

‘नागरिक देवो भव’

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं में चयन के दो प्रमुख आधार होने चाहिए—राष्ट्र सर्वोपरि और नागरिक सर्वोपरि। उन्होंने ‘नागरिक देवो भव’ को 21वीं सदी के प्रशासन का मूल मंत्र बताया।

ज्ञान के साथ प्रेरणा भी परखी जाए

पीएम मोदी ने कहा कि UPSC जैसी परीक्षाओं में केवल उम्मीदवार का ज्ञान ही नहीं, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि वह प्रशासनिक सेवा में क्यों आना चाहता है।

जनसेवा की आंतरिक प्रेरणा रखने वाले युवाओं का चयन बदलती जन आकांक्षाओं के अनुरूप प्रशासन को अधिक प्रभावी बना सकता है।

AI और नई तकनीक के दौर में बदलना होगा प्रशासन

उन्होंने कहा कि 2047 का भारत तेजी से बदल रहा होगा। नागरिक AI आधारित त्वरित और वास्तविक समय के समाधान की अपेक्षा करेंगे।

ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों में दूरदर्शिता और जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता जरूरी होगी। डीपफेक, सूचना युद्ध, एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह और जलवायु न्याय जैसी नई चुनौतियां भी सामने होंगी।

परीक्षा प्रक्रिया छोटी करने पर जोर

प्रधानमंत्री ने परीक्षा चक्र को कम करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि लंबी भर्ती प्रक्रिया से अभ्यर्थियों और उनके परिवारों पर कोचिंग, किराये और यात्रा का आर्थिक बोझ बढ़ता है।

परीक्षा प्रक्रिया को छोटा करना समानता और निष्पक्षता से भी जुड़ा विषय है।

‘जनहितैषी, सक्रिय और सुशासन’ बने आधार

पीएम मोदी ने 21वीं सदी की नई कार्य संस्कृति के तीन प्रमुख आधार बताए—जनहितैषी, सक्रिय और सुशासन। उन्होंने ऐसे अधिकारियों की जरूरत बताई जो समस्याओं का पहले से अनुमान लगाएं, नए समाधान खोजें और नागरिकों का जीवन आसान बनाएं।

अवसरों का दायरा बढ़ा

प्रधानमंत्री ने कहा कि UPSC में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी 1952 के करीब 3 प्रतिशत से बढ़कर अब 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

उन्होंने इसे देश में अवसरों के विस्तार का संकेत बताया।
UPSC की स्वतंत्रता और निष्पक्षता कायम रहे.

शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा कि आयोग की दूसरी सदी में भी उसकी स्वतंत्रता, निष्पक्षता, योग्यता, गोपनीयता और पारदर्शी प्रक्रियाओं जैसे मूल मूल्यों को अक्षुण्ण रखना जरूरी है।

इस अवसर पर स्मारक डाक टिकट, विशेष सिक्का और 100 महत्वपूर्ण केस कानूनों का संकलन भी जारी किया गया।


Share This Article