Share This Article रायपुर, 06 अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत फिलहाल ‘प्लेटो’ यानी गतिरोध के दौर में पहुंच गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि दोनों देशों के लिए अब आगे और रियायत देना या लेना ‘बहुत मुश्किल’ हो सकता है। हालांकि बातचीत अभी जारी है और समझौते की गुंजाइश बाकी है। व्यापार घाटा बना सबसे बड़ा मुद्दा अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। सीतारमण के मुताबिक, टैरिफ को बातचीत के साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया, लेकिन भारत का मानना है कि व्यापार असंतुलन का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए। रूसी तेल खरीद से बढ़ा दबाव भारत द्वारा रूस से ऊर्जा खरीदना भी अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में बड़ी चुनौती बन गया है। हालिया अमेरिकी कानून से रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी अतिरिक्त टैरिफ का खतरा बढ़ा है। इससे भारत पर दबाव और बढ़ा है। जल्द डील की संभावना कम अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर पहले ही कह चुके हैं कि समझौता तुरंत होने की स्थिति में नहीं है। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी अधिकारियों के बीच बातचीत के बावजूद कई अहम मुद्दे अभी सुलझने बाकी हैं। भारत दूसरे साझेदारों पर भी बढ़ा रहा फोकस सीतारमण ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितता के बीच भारत द्विपक्षीय समझौतों और नए व्यापारिक साझेदारों पर जोर दे रहा है। कनाडा और रूस समेत कई देशों के साथ निवेश समझौतों पर भी बातचीत जारी है। Share This Article Post navigation साइबर हमलों से बैंकों के ग्राहकों का डेटा लीक, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने दिए जांच के आदेश भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट से अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा: विदेश मंत्री