Share This Article Indian Tourism : केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत में पर्यटन के विकास के लिए केवल ऐतिहासिक स्थलों का प्रचार पर्याप्त नहीं है। सरकार, निजी कंपनियों, तकनीकी संस्थानों और स्थानीय समुदायों की साझेदारी से पर्यटन को नई दिशा दी जा सकती है। इससे देश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलने के साथ स्थानीय रोजगार, छोटे कारोबार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन का नया मॉडल: साझेदारी और सहभागिता भारत में ऐतिहासिक स्मारकों, धार्मिक स्थलों, पहाड़ों, समुद्र तटों, वन्यजीवों और पारंपरिक कला-संस्कृति की समृद्ध विरासत है। पर्यटन मंत्री के अनुसार, इन स्थलों को लोकप्रिय बनाने के साथ वहाँ तक पहुँचने, ठहरने और स्थानीय संस्कृति का अनुभव करने की बेहतर व्यवस्था जरूरी है। इसके लिए सरकार, उद्योग जगत और समुदायों को मिलकर काम करना होगा। डिजिटल तकनीक और कहानियों से बढ़ेगी पहचान आज पर्यटक केवल पर्यटन स्थल देखने के बजाय वहाँ की संस्कृति, खान-पान, संगीत, हस्तशिल्प और परंपराओं को करीब से अनुभव करना चाहते हैं। फिल्मों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है। वाराणसी बनेगा सांस्कृतिक पर्यटन का उदाहरण वाराणसी में गंगा के सूर्योदय, शास्त्रीय संगीत, साहित्य, बनारसी बुनकरों और ऐतिहासिक धरोहरों को जोड़कर पर्यटकों के लिए विशेष अनुभव विकसित करने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य केवल किसी स्थल का प्रचार करना नहीं, बल्कि पर्यटकों को उसकी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है। 11 रणनीतिक समझौतों से सहयोग को बढ़ावा लेख के अनुसार, पर्यटन मंत्रालय ने उद्योग जगत के साथ 11 रणनीतिक समझौता ज्ञापनों को अंतिम रूप दिया है। इनमें से पांच का आदान-प्रदान विश्व पर्यटन दिवस 2026 के अवसर पर हुआ। इन साझेदारियों के जरिए तकनीक, हवाई संपर्क, आतिथ्य, डिजिटल प्रचार और स्थानीय उद्यमों को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। गाँवों और होमस्टे को मिलेगा अवसर पर्यटन का लाभ बड़े शहरों और लोकप्रिय स्थलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। होमस्टे, स्थानीय कारीगरों, महिला उद्यमियों और छोटे कारोबारियों को भी पर्यटन से जोड़ना जरूरी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और बेहतर प्रचार से कम चर्चित गाँवों और पर्यटन स्थलों तक अधिक पर्यटक पहुँच सकते हैं। स्थानीय रोजगार और विरासत संरक्षण पर जोर पर्यटन की सफलता केवल पर्यटकों की संख्या से नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को मिलने वाले लाभ से भी मापी जानी चाहिए। इससे युवाओं को रोजगार, कारीगरों को बाजार और महिला उद्यमियों को कारोबार के नए अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, स्थानीय समुदायों की भागीदारी से सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलेगा। क्या है भारत के पर्यटन विकास का लक्ष्य? पर्यटन मंत्री के विचारों के अनुसार, भारत को पर्यटन स्थलों के प्रचार से आगे बढ़कर ऐसा तंत्र विकसित करना होगा, जिसमें सरकार बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराए, निजी क्षेत्र निवेश और तकनीक लाए तथा स्थानीय समुदाय पर्यटन के विकास में सक्रिय भागीदार बनें। Share This Article Post navigation Chhattisgarh Tourism बोर्ड देगा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’…! 10 श्रेणियों में मिलेंगे पुरस्कार