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रायपुर, 16 अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / भारत में आर्द्रभूमियों के संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि और उत्तर प्रदेश की सौज झील को रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है।

इसके साथ ही देश में अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 अक्टूबर को इसकी घोषणा की।

जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार आर्द्रभूमियों के संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है। ये क्षेत्र जैव विविधता को सुरक्षित रखने, जल संरक्षण, जलवायु संतुलन और स्थानीय लोगों की आजीविका बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

क्या है रामसर स्थल का महत्व?

रामसर स्थल ऐसे आर्द्रभूमि क्षेत्र होते हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय महत्व के आधार पर मान्यता दी जाती है। इनका संरक्षण जल संसाधनों, वन्यजीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने में मदद करता है।

पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

सुखना आर्द्रभूमि और सौज झील को मिली इस मान्यता से इन क्षेत्रों की प्राकृतिक पहचान और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है। मंत्री ने लोगों से इन स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता देखने और इनके संरक्षण के महत्व को समझने की अपील की।


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