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रायपुर, 18 अक्टूबर 2026। ETrendingIndia / भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने पोषक तत्वों से भरपूर बैंगनी आलू की किस्म ‘कुफरी जामुनिया’ विकसित की है। इसमें सामान्य आलू की तुलना में विटामिन-C, आयरन और जिंक अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।

इसका आकर्षक बैंगनी रंग एंथोसायनिन जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी को दर्शाता है। यह किस्म पोषण सुरक्षा बढ़ाने के साथ किसानों के लिए भी बेहतर संभावनाएं प्रस्तुत करती है।

सामान्य आलू से कितना ज्यादा पोषण?

केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPRI) के अनुसार, प्रति 100 ग्राम आलू में पोषक तत्वों की तुलना इस प्रकार है:

  • विटामिन-C: कुफरी जामुनिया में 42.75 मिलीग्राम, जबकि सामान्य आलू में 23.15 मिलीग्राम।
  • जिंक: बैंगनी आलू में 2.28 मिलीग्राम, जबकि सामान्य आलू में 0.28 मिलीग्राम।
  • आयरन: बैंगनी आलू में 3.22 मिलीग्राम, जबकि सामान्य आलू में 0.57 मिलीग्राम।

एक हेक्टेयर में 32 से 35 टन उत्पादन

उन्नत कृषि पद्धतियों के तहत कुफरी जामुनिया की औसत उपज 32 से 35 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है। संस्थान के परीक्षणों में 90 दिनों के दौरान लगभग 49 टन प्रति हेक्टेयर उपज भी दर्ज की गई। इसके कंदों में भंडारण के दौरान वजन घटने और सड़न की समस्या अपेक्षाकृत कम रहती है।

किन राज्यों में हो सकती है खेती?

कुफरी जामुनिया को उत्तर भारतीय मैदानी क्षेत्रों में खेती के लिए अनुशंसित किया गया है। वहीं, कुफरी नीलकंठ किस्म छत्तीसगढ़ सहित पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और मध्य प्रदेश में खेती के लिए उपयुक्त है।

सब्जी से लेकर डोसा तक इस्तेमाल

बैंगनी आलू से सब्जी, पराठा, पूरी, हलवा, उपमा, डोसा और इडली जैसे व्यंजन बनाए जा सकते हैं। इसका उपयोग आटा और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद तैयार करने में भी किया जा सकता है।

क्या है खास?

कुफरी जामुनिया जैसी जैव-संवर्धित फसलें रोजमर्रा के भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने और छिपी हुई भूख की समस्या से निपटने में मददगार हो सकती हैं।


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