Share This Article रायपुर, 21 अक्टूबर 2026। ETrendingIndia / नई दिल्ली के भारत मंडपम में 7वें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने किया। इस तकनीक के तहत खेतों में सौर पैनल लगाकर एक ही जमीन से फसल और बिजली, दोनों का उत्पादन किया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य छोटे और सीमांत किसानों को इस व्यवस्था से जोड़ना, ग्रामीण रोजगार बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को गति देना है। एक ही खेत से फसल और बिजली केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी बन सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि सौर पैनलों की ऊंचाई और उनके बीच की दूरी ऐसी होनी चाहिए, जिससे खेती और फसल चक्र प्रभावित न हों। छोटे किसानों के हितों पर जोर भारत में 85 प्रतिशत से अधिक किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं। मंत्री ने कहा कि एग्रीवोल्टाइक नीति ऐसी होनी चाहिए, जिसे छोटे किसान भी आसानी से अपना सकें। बिजली खरीद, समय पर भुगतान और परियोजना समाप्त होने पर सौर पैनल हटाने की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होनी चाहिए। 2050 तक बिजली की मांग पूरी करने की संभावना केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार, देश की लगभग 4.75 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि एग्रीवोल्टाइक के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि इस उपयुक्त भूमि के 10 प्रतिशत हिस्से पर भी यह तकनीक अपनाने से वर्ष 2050 तक देश की अनुमानित बिजली मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है। गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 308 गीगावाट के पार प्रह्लाद जोशी ने बताया कि देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 560 गीगावाट से अधिक हो गई है, जबकि गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 308 गीगावाट पार कर चुकी है। सरकार सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए नए कार्यक्रमों पर काम कर रही है। पीएम-कुसुम के अगले चरण में बड़ा अभियान मंत्री के मुताबिक, पीएम-कुसुम योजना के तहत अब तक 30 लाख कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है। योजना के अगले चरण में दुनिया के बड़े एग्रीवोल्टाइक कार्यक्रमों में शामिल एक महत्वाकांक्षी अभियान शुरू करने की तैयारी है। गांवों में रोजगार के नए अवसर एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को सौर उपकरणों के संचालन, मरम्मत और रखरखाव से जुड़े रोजगार मिल सकते हैं। अध्ययन के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 3.32 लाख पूर्णकालिक स्थानीय रोजगार पैदा होने की संभावना है। क्या है खास? एग्रीवोल्टाइक तकनीक खेती और सौर ऊर्जा को एक साथ जोड़ती है। इससे किसानों को फसल के साथ बिजली उत्पादन से अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है। हालांकि, इसका लाभ स्थानीय परिस्थितियों, फसल के प्रकार, परियोजना की लागत और बिजली खरीद की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। Share This Article Post navigation India Military Exercise : अंडमान-निकोबार में भारत का बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू, तीनों सेनाएं दिखाएंगी ताकत, 22 अक्टूबर तक अलर्ट भारत की राष्ट्रपति ने 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के चयनित कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए