Share This Article रायपुर, 25 अक्टूबर 2026। ETrendingIndia / जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प को प्रोत्साहित करने तथा जनजातीय कारीगरों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव ‘आदि बाजार-2026Ó का शुभारंभ किया गया। भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ लिमिटेड (ट्राइफेड) के रायपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन छत्तीसगढ़ शासन के कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री रामविचार नेताम ने किया। टाउन हॉल, कलेक्ट्रेट परिसर, घड़ी चौक के पास आयोजित यह महोत्सव 2 नवंबर 2026 तक चलेगा। इसमें देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय कारीगरों और शिल्पकारों के हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की जा रही है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ की प्रबंध संचालक एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीता गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री रामविचार नेताम ने देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों, शिल्पकारों, कारीगरों और अधिकारियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के पास पीढिय़ों से चली आ रही समृद्ध कला, विशिष्ट शिल्प और पारंपरिक कौशल की अमूल्य विरासत है। जनजातीय कारीगर अपने उत्पादों के माध्यम से अपनी संस्कृति, परंपराओं, रहन-सहन और स्थानीय विशेषताओं को अभिव्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना और कारीगरों को उनके परिश्रम का उचित मूल्य दिलाना आवश्यक है। आज बड़े शहरों में हस्तनिर्मित वस्तुओं, पारंपरिक आभूषणों और जनजातीय शिल्पकृतियों की मांग बढ़ रही है। लोग इन वस्तुओं को घरों की सजावट और संग्रहणीय सामग्री के रूप में भी पसंद कर रहे हैं। ऐसे में ‘आदि बाजार जैसे आयोजन कारीगरों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर देते हैं।मंत्री ने कहा कि विभिन्न राज्यों के कारीगरों को एक मंच पर अपने उत्पाद प्रस्तुत करने से एक-दूसरे की कला, तकनीक और कार्यशैली को समझने का अवसर मिलता है। इससे उनके अनुभव में वृद्धि होती है तथा नवाचार और कौशल विकास को प्रोत्साहन मिलता है। मंत्री नेताम ने ट्राइफेड के प्रयासों की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में भी महासंघ का स्टॉल लगाया जाए। इससे अधिक से अधिक लोगों को जनजातीय उत्पादों और उनकी विशेषताओं की जानकारी मिल सकेगी। उत्पादों की बिक्री बढऩे से कारीगरों की आय में वृद्धि होगी और उन्हें आजीविका के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने ट्राइफेड से संबद्ध पंजीकृत समितियों और कारीगरों के बीच समय-समय पर प्रतियोगिताएं आयोजित करने का भी सुझाव दिया। उनके अनुसार, ऐसी प्रतियोगिताओं से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा, कारीगरों के कौशल में निखार आएगा और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा। मंत्री ने कहा कि वन एवं लघु वनोपज, जड़ी-बूटियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उत्पादों के निर्माण में भी जनजातीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन उत्पादों को बाजार से जोडऩे और उनका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि जनजातीय उद्यमियों, कारीगरों और शिल्पकारों को आगे बढऩे के नए अवसर मिल सकें।दस दिवसीय ‘आदि बाजार-2026Ó में देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 80 जनजातीय कारी गरों और शिल्पकारों के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए करीब 30 स्टॉल लगाए गए हैं। य हां आगंतुकों को पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, वस्त्र, पारंपरिक आभूषण, चित्रकला तथा प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों की खरीदारी का अवसर मिल रहा है।प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ का कोसा रेशम और ढोकरा शिल्प, ओडिशा की संबलपुरी साडिय़ां एवं सौरा चित्रकला, मध्य प्रदेश की बाघ छपाई, माहेश्वरी साडिय़ां एवं गोंड चित्रकला आकर्षण का केंद्र हैं। इसके अलावा पश्चि म बंगाल की कांथा कढ़ाई वाली साडिय़ां और पारंपरिक आभूषण, राजस्थान के पारंपरिक वस्त्र एवं आभूषण, झारखंड के जूट उत्पाद एवं जनजातीय आभूषण तथा पूर्वोत्तर राज्यों के बेंत और बांस से बने शिल्प भी प्रदर्शित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बांस उत्पाद, अराकू कॉफी तथा अन्य विशिष्ट हस्तशिल्प भी महोत्सव में उपलब्ध हैं। इन उत्पादों के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक कला, शिल्प तकनीक और सांस्कृतिक विविधता को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिल रहा है। मंत्री रामविचार नेताम ने सफल आयोजन के लिए ट्राइफेड और आयोजकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस के आयोजन जनजातीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण के साथ कारीगरों की आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।ट्राइफेड ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे 2 नवंबर 2026 तक टाउन हॉल, कलेक्ट्रेट परिसर, रायपुर पहुंचकर महोत्सव का अवलोकन करें और जनजातीय कारीगरों के उत्पाद खरीदें। इससे देश की समृद्ध जनजातीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के साथ पारंपरिक कारीगरों की आजीविका को भी प्रोत्साहन मिलेगा। Share This Article Post navigation Smriti Irani Raipur Visit : छत्तीसगढ़ भाजपा में संगठन की बड़ी कवायद! स्मृति ईरानी के रायपुर दौरे में 12 बैठकें, नेताओं से होगा सीधा संवाद एसी का आउटडोर चोरी कर बेचने वाला आरोपी और दो खरीदार गिरफ्तार