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रायपुर, 30 अक्टूबर 2026/ ETrendingIndia / भारत में हर साल करीब 25 लाख लोग ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्काघात) से प्रभावित हो रहे हैं। चिंता की बात यह है कि अब यह बीमारी बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि खराब जीवनशैली के कारण युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने विश्व स्ट्रोक दिवस पर इस बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई।

जीवनशैली में बदलाव जरूरी

राज्यपाल ने कहा कि अनियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अस्वस्थ खानपान जैसी आदतें गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाती हैं। उन्होंने लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और नियमित जांच कराने की सलाह दी।

समय पर इलाज से बच सकती है जान

उन्होंने मस्तिष्काघात के लक्षणों की समय पर पहचान और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में तत्काल उपचार पर जोर दिया। स्ट्रोक के दौरान चेहरे का एक तरफ झुकना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी और बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है।

अनुसंधान और जागरूकता पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि स्ट्रोक से होने वाली मृत्यु और दिव्यांगता को कम करने के लिए चिकित्सा अनुसंधान, बेहतर उपचार सुविधाओं और जनजागरूकता को बढ़ावा देना आवश्यक है।

विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से गंभीर नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


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