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बर्लिन/पेरिस, 1 नवंबर 2026। Europe Protest : यूरोप के कई देशों में लगातार दूसरे सप्ताह सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। फ्रांस और जर्मनी समेत कई देशों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। जर्मनी में प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में लूटपाट की और पुलिस पर पेट्रोल बम फेंके। वहीं फ्रांस में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। इन प्रदर्शनों का आयोजन ‘जनरेशन जेड रेजिस्ट’ नामक समूह की ओर से किया गया। जर्मनी के बर्लिन, फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख सहित 34 शहरों में प्रदर्शन हुए। फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, देश में 560 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जर्मनी के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन

जर्मनी में प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर हिंसा भड़क गई। हैम्बर्ग में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स में आग लगा दी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें नियंत्रित करने के लिए मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया। बर्लिन में भी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बोतलें और अंडे फेंके। कुछ स्थानों पर पुलिस के खिलाफ आतिशबाजी किए जाने की भी जानकारी सामने आई।

फ्रैंकफर्ट में एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से बताया गया कि कम से कम दो दुकानों में लूटपाट हुई और कई अन्य दुकानों को नुकसान पहुंचा। पुलिस को कड़ी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाने में सफलता मिली।

फ्रांस में 3.20 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे

फ्रांस में भी विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण रहे। जानकारी के मुताबिक, करीब 3.20 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। पेरिस के पोर्ट डे वर्साय के पास प्रदर्शनकारियों ने कांच की बोतलें और पटाखे फेंके। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

लियोन में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके, जिसके जवाब में अधिकारियों ने आंसू गैस के गोले दागे।

कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव

यूरोप के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। जर्मनी में दुकानों को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर पेट्रोल बम फेंकने की घटनाएं सामने आईं। वहीं फ्रांस के कई इलाकों में पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।

560 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी

फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान 560 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कई शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। लगातार दूसरे सप्ताह जारी इन प्रदर्शनों ने यूरोप के कई देशों में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।


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