Urban Growth Conclave 2.0Urban Growth Conclave 2.0
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भोपाल, 5 नवंबर 2026। Urban Growth Conclave 2.0 : मध्यप्रदेश सरकार जल संरक्षण और भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई नीति लाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में तैयार की गई ‘मध्यप्रदेश उपचारित अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग नीति-2026’ का प्रारूप सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया गया है। सरकार का लक्ष्य उपचारित अपशिष्ट जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित कर पेयजल और भूजल पर निर्भरता कम करना है।

2037 तक 50 प्रतिशत उपचारित जल के पुनः उपयोग का लक्ष्य

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में नीति का प्रारूप जारी किया गया। इसमें सीवेज के 100 प्रतिशत उपचार और उपचारित पानी के दोबारा इस्तेमाल के लिए चरणबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत वर्ष 2027 तक 20 प्रतिशत, 2030 तक 30 प्रतिशत और 2037 तक 50 प्रतिशत उपचारित जल के पुनः उपयोग का लक्ष्य रखा गया है।

उद्योगों से लेकर सिंचाई तक होगा इस्तेमाल

प्रस्तावित नीति के तहत उपचारित पानी का उपयोग उद्योगों, निर्माण कार्यों, उद्यानों, लैंडस्केपिंग, सड़क सफाई, शौचालयों में फ्लशिंग और अग्निशमन जैसे कार्यों में किया जाएगा। इसके अलावा उपयुक्त कृषि और सिंचाई गतिविधियों में भी उपचारित जल के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे साफ पानी की गैर-जरूरी खपत कम करने में मदद मिलेगी।

दोहरी पाइपलाइन से सुरक्षित जल वितरण की व्यवस्था

जनस्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए उपचारित पानी की गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य होगा। इसके लिए नियमित निगरानी के साथ पेयजल आपूर्ति से अलग दोहरी पाइपलाइन व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव है, ताकि उपचारित जल और पीने के पानी का मिश्रण न हो।

निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

नीति के तहत उपचारित पानी के भंडारण, परिवहन और वितरण नेटवर्क, टैंकर फिलिंग स्टेशन तथा दोहरी पाइपलाइन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), केंद्र और राज्य की योजनाओं, CSR तथा उपचारित जल की बिक्री से मिलने वाले राजस्व के जरिए परियोजनाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की तैयारी कर रही है।

आम लोगों और विशेषज्ञों से मांगे गए सुझाव

नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति और तकनीकी प्रकोष्ठ बनाने का प्रस्ताव है। इनके माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, पानी की मांग का आकलन, दर निर्धारण और नियमित निगरानी की जाएगी। सरकार ने नीति के प्रारूप पर विशेषज्ञों के साथ आम नागरिकों से भी सुझाव आमंत्रित किए हैं।


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