Share This Article नई दिल्ली, 7 नवंबर 2026। CJI : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में कांग्रेस और संबंधित नेताओं से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायपालिका की आलोचना और न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के बीच अंतर समझना जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली टिप्पणियों की छूट मिल जाती है। CJI के खिलाफ टिप्पणी को लेकर उठा विवाद मामला सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक पोस्ट से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं और समर्थकों की ओर से ऐसी टिप्पणियां की गईं, जिनसे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। याचिकाकर्ता ने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग की है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायपालिका के सम्मान पर अदालत की टिप्पणी सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका सहित सभी संस्थाओं की आलोचना की जा सकती है, लेकिन आलोचना संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर होनी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी न्यायाधीश की व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने या न्यायिक संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने के प्रयासों को सामान्य राजनीतिक आलोचना नहीं माना जा सकता। कांग्रेस और संबंधित नेताओं से मांगा गया जवाब याचिका में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और सोशल मीडिया पर कथित टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले में सार्वजनिक माफी, पोस्ट हटाने और भविष्य में ऐसी टिप्पणियों से बचने जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं। माफी के साथ जवाबदेही पर भी जोर सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि केवल औपचारिक माफी पर्याप्त नहीं हो सकती। माफी की वास्तविक मंशा और परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। अदालत ने संबंधित पक्षों से इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। अब आगे की सुनवाई में जवाब और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले पर विचार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई पर नजर इस प्रकरण में न्यायपालिका की प्रतिष्ठा, सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे जुड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई में संबंधित पक्षों के जवाब और याचिका में उठाए गए तथ्यों पर विचार किया जाएगा। Share This Article Post navigation केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू ने क्रेआ मैड्रिड नुएवो नॉर्ते का किया दौरा… यूरोप की सबसे बड़ी शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं में है एक … Supreme Court Verdict : पंजाब-हरियाणा और हिमाचल के बीच बिजली बकाया विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 7,719 करोड़ रुपये चुकाएगा हिमाचल प्रदेश