रायपुर 10 अक्तूबर 2025 / ETrendingIndia / Symposium on “Cell and Gene Therapy” at Christian Medical College, Vellore / कोशिका एवं जीन थेरेपी 2025 , केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी), वेल्लोर में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से स्टेम सेल अनुसंधान केंद्र (सीएससीआर) द्वारा आयोजित 10वीं वार्षिक “कोशिका एवं जीन थेरेपी” संगोष्ठी का वर्चुअल उद्घाटन किया।
केंद्रीय मंत्री ने मनोचिकित्सा विभाग में 42 बिस्तरों वाले एक नए मध्यम-लागत वाले निजी वार्ड का भी उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा, “सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए आवश्यक है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएससीआर की ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की, जिसने हाल ही में हीमोफीलिया ए के लिए भारत में पहली बार मानव जीन थेरेपी का परीक्षण पूरा किया। थक्का जमाने वाले फैक्टर VIII की कमी से होने वाले इस वंशानुगत रक्तस्राव विकार के लिए लंबे समय से महंगे आजीवन उपचार की आवश्यकता रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह सिर्फ एक वैज्ञानिक मील का पत्थर नहीं है बल्कि यह भारत और अन्य निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों के लिए सस्ती, सुलभ जीन थेरेपी की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है।”
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव विनिर्माण में भारत आज एशिया-प्रशांत में तीसरे स्थान पर और वैश्विक स्तर पर 12वें स्थान पर है, जबकि इस वर्ष के अंत तक फार्मा निर्यात 300 बिलियन अमरीकी डॉलर को पार कर जाने की उम्मीद है।
भारत की जैव अर्थव्यवस्था 2014 में 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर आज लगभग 170 बिलियन डॉलर हो गई है और 2030 तक इसके 300 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
फार्मा निर्यात का मूल्य 27.8 बिलियन डॉलर है, जो इस वर्ष 30 बिलियन डॉलर को पार कर जाएगा, जबकि चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र, जो वर्तमान में 12 बिलियन डॉलर का है, सालाना 15-20% की दर से बढ़ रहा है और 2030 तक 50 बिलियन डॉलर को छूने की उम्मीद है।
बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में मात्र 50 से बढ़कर आज 11,000 से अधिक हो गई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बायोई3 नीति, बीआईआरएसी के सार्वजनिक-निजी मॉडल, 70% गैर-सरकारी वित्तपोषण वाले राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान एवं विकास कोष जैसी नीतियों और कार्यक्रमों से मज़बूत हो रहा है।
अनुसंधान एवं विकास पर सकल व्यय ₹60,000 करोड़ से दोगुना होकर ₹1,27,000 करोड़ हो गया है, जबकि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) बजट ₹1,500 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹7,000 करोड़ हो गया है, और अब 55% से ज़्यादा पेटेंट भारतीयों द्वारा दायर किए जाते हैं।
उन्होंने कोविड के लिए दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन, एचपीवी वैक्सीन और एंटीबायोटिक नेफ़ेट्रोवैसिन के विकास जैसी वैक्सीन संबंधी सफलताओं का हवाला दिया, जो जैव प्रौद्योगिकी में अग्रणी के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका के उदाहरण हैं।
सीएमसी और सीएससीआर की उपलब्धियां इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे हमारे संस्थान 2047 के भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।”
