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ETrendingIndia / आम में द्विवार्षिक फलन समस्या , देशभर में स्थिति


देश में आम की खेती सामान्य रूप से द्विवार्षिक (एक साल फल, एक साल कम फल) समस्या से मुक्त है। यह समस्या मुख्यतः उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में देखी जाती है, जबकि दक्षिण भारत में इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम है।

वैज्ञानिक अध्ययन


आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों द्वारा आम की खेती पर गहन अध्ययन किए गए हैं। शोध में दशहरी, लंगड़ा, चौसा, फजली और अल्फोंसो जैसी किस्मों को द्विवार्षिक फलन से अधिक प्रभावित पाया गया है। इसके कारणों में आनुवंशिक गुण, पोषक तत्वों का संतुलन, हार्मोनल प्रभाव, जलवायु, कृषि पद्धतियां और फसल भार शामिल हैं।

समाधान के प्रयास


आईसीएआर ने आम्रपाली, मल्लिका, पूसा अरुणिमा, नीलम, तोतापुरी, बंगनपल्ली जैसी नियमित फल देने वाली किस्मों का विकास और प्रसार किया है। गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री किसानों तक उपलब्ध कराई जा रही है।

आधुनिक तकनीकें


बेहतर बागवानी प्रबंधन, संतुलित पोषण, जल प्रबंधन, छंटाई, नैनोफ्लोरिन और पैक्लोबुट्राज़ोल के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकारी जानकारी


यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में दी।