रायपुर 19 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / AI बनाम इंसानी दिमाग , दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित ‘लीडर्स टॉक’ कार्यक्रम में इंफोसिस के संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) काम को तेजी से कर सकता है, लेकिन इंसानी दिमाग से बेहतर कोई नहीं हो सकता। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि एआई से डरने के बजाय उसे सहयोगी के रूप में अपनाएं।
AI को बनाएं सहयोगी, प्रतिस्पर्धी नहीं
मूर्ति ने कहा कि “थिंक विद एआई, बिल्ड विद एआई” की सोच अपनानी चाहिए। एआई को एक सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने वैज्ञानिक Stephen Wolfram का हवाला देते हुए कहा कि एआई इंसान का सहयोगी टूल है, मालिक नहीं।
उच्च स्तरीय कामों में AI की भूमिका
उन्होंने बताया कि एआई रिमोट सर्जरी, सटीक उत्पादन, कोड जनरेशन और सॉफ्टवेयर विकास जैसे जटिल कार्यों में मददगार है। लेकिन इसे बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रशिक्षण और मानवीय निगरानी जरूरी है।
मानव मस्तिष्क रहेगा ‘बॉस’
मूर्ति ने स्पष्ट किया कि एआई के आने से मानव रचनात्मकता खत्म नहीं होगी। इंसान नए प्रयोग करता रहेगा और तकनीक को बेहतर बनाता रहेगा।
सम्मान कमाना सबसे बड़ा लक्ष्य
श्री नारायणमूर्ति ने कहा कि व्यापार में मुनाफा दूसरे नंबर पर आता है। असली सफलता लोगों के बीच सम्मान और भरोसा कमाने में है। उनका लक्ष्य सबसे बड़ा उद्योगपति बनना नहीं, बल्कि सम्मान अर्जित करना रहा है।
