Share This Article रायपुरर, 09 सितंबर / ETrendingIndia / अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने 8 सितंबर को ओमान की खाड़ी और ईरान के खार्ग द्वीप के पास ईरान से जुड़े पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाकर हमला किया। अमेरिका ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की ओर से अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने की कोशिशों के जवाब में की गई। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया। इस घटनाक्रम से खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने बताया कि 8 सितंबर को अमेरिकी सेना ने ईरान का कच्चा तेल ले जा रहे पांच जहाजों को नष्ट किया। इन जहाजों के नाम एमटी कविज, एमटी चारमीनार, एमटी होराइजन-1, एमटी रीस्को और एमटी डेर्या बताए गए हैं। इनमें से चार जहाजों पर ओमान की खाड़ी में हमला किया गया, जबकि एमटी डेर्या को ईरान के खार्ग द्वीप के पास निशाना बनाया गया।अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार, हमले से पहले जहाजों के चालक दल को उन्हें छोडऩे का आदेश दिया गया था। इसके बाद जहाजों को निष्क्रिय कर दिया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि आईआरजीसी ने पिछले दो दिनों में दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों को निशाना बनाने का प्रयास किया था। अमेरिका ने दावा किया कि उसके युद्धपोतों ने इन हमलों की कोशिशों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया और क्षेत्र में गश्त जारी रखी। इस दौरान किसी अमेरिकी सैनिक के घायल होने या मारे जाने की सूचना नहीं है। अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने जॉर्डन के अल-अजराक हवाई अड्डे पर तैनात अमेरिकी सैन्य दलों को निशाना बनाने का दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्डन के अधिकारियों ने बताया कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली ने दागी गई 20 मिसाइलों में से 18 को नष्ट कर दिया, जबकि दो मिसाइलें खुले इलाकों में जाकर गिरीं। हालांकि, आईआरजीसी ने अल-अजराक हवाई अड्डे पर किए गए हमले को भीषण बताते हुए दावा किया कि मिसाइल हमले में अमेरिकी लड़ाकू विमानों के हैंगर नष्ट हो गए। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में 10 जहाजों पर हमला करने का भी दावा किया है। ईरान के मुताबिक, इनमें दो अमेरिकी जहाज और आठ तेल टैंकर शामिल हैं। इसके साथ ही आईआरजीसी ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों पर मौजूद जहाजों को भी धमकी दी है। उसने इन बंदरगाहों में मौजूद तेल टैंकरों के चालक दल को तत्काल जहाज छोडऩे की चेतावनी दी है। आईआरजीसी ने कहा कि कुवैती और बहरीन के बंदरगाहों में मौजूद सभी तेल टैंकरों के चालक दल अपने जहाजों को तुरंत छोड़ दें, चाहे जहाज समुद्र में लंगर डाले हों या बंदरगाह पर खड़े हों। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 99.46 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। करीब एक महीने की शांति के बाद एक सप्ताह पहले दोबारा शुरू हुई लड़ाई के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह के सैन्य टकराव से दुनिया के महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों पर असर पडऩे की आशंका है। दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तेज होते संघर्ष ने भी पश्चिम एशिया की स्थिति को और जटिल बना दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव तथा क्षेत्र में अन्य संघर्षों के कारण ऊर्जा आपूर्ति, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बढऩे की आशंका जताई जा रही है। Share This Article Post navigation ईरान ने अमेरिका की सबसे आधुनिक मानवरहित पनडुब्बी को पकडऩे का दावा किया बांग्लादेश में फैला खसरे का भीषण प्रकोप, अब तक हुई 1,000 लोगों की मौत