रायपुर, 22 मई 2026/ ETrendingIndia / Hundreds of Indians at risk due to layoffs in tech companies: Fears of being evacuated from US / अमेरिका टेक छंटनी , टेक कंपनियों में छंटनी के नए दौर ने अमेरिका में रह रहे सैकड़ों भारतीयों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। सालों से ये लोग अमेरिका में इन कंपनियों में काम कर रहे हैं। कई तो अपने परिवार को भी अमेरिका ले गए हैं। हालांकि, अब छंटनी ने इन लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। 60 दिन के भीतर इन लोगों को नई नौकरी नहीं मिली तो इन्हें अमेरिका से निकाला जा सकता है।
अमेरिका की सिलिकॉन वैली के कर्मचारियों पर हर दिन नौकरी से निकाले जाने का खतरा मंडरा रहा है। फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा ने एआई के चलते लगभग 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की है। इसी तरह अमेजन पिछले कुछ सालों से लगातार छंटनी कर रही है।
लिंक्डइन ने भी हाल के महीनों में कई लोगों को नौकरी से निकाला है। इसके पीछे एआई और ऑटोमेशन को वजह बताया जा रहा है।
अमेरिका में टेक कंपनियों में काम कर रहे ज्यादातर भारतीय तकनीकी पेशेवर एच-1बी वीजा पर काम करते हैं। नियम कहता है कि एच-1बी वीजा धारक को नौकरी छूटने के बाद 60 दिन के भीतर नई नौकरी तलाशना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्हें अमेरिका छोडऩे को कहा जा सकता है। ऐसे में नौकरी से निकाले गए भारतीय रोजाना के खर्च के साथ नई नौकरी ढूंढने की समयसीमा से भी चिंतित हैं।
अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा नियमों के अनुसार, नौकरी से निकाले गए एच-1बी कर्मचारियों को आमतौर पर 60 दिनों की मोहलत मिलती है, ताकि वे अपने अगले कदम के बारे में निर्णय ले सकें। इस दौरान वे किसी नई नौकरी की तलाश कर सकते हैं, जो उनके वीजा को प्रायोजित करने के लिए तैयार हो या किसी अन्य वीजा श्रेणी के लिए आवेदन कर सकते हैं। अगर ये दोनों नहीं होते तो अमेरिका छोडऩे की तैयारी कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में इस साल केवल तकनीकी कंपनियों में 1.10 लाख से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरियां गई हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा विदेशी कामगारों, खासतौर पर भारतीयों का है, जो एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका गए हैं।
दरअसल, भारतीय एच-1बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। एक सर्वे के मुताबिक, नौकरी से निकाले गए लगभग आधे भारतीय देश लौटने पर, जबकि अन्य कनाडा और यूरोप को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
