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रायपुर, 02 अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / एशियाई खेलों में शुक्रवार का दिन भारतीय खेलों के लिए ऐतिहासिक रहा। भारत ने एक ही दिन कुश्ती, बॉक्सिंग, तीरंदाजी और हॉकी में शानदार प्रदर्शन किया।

महिला हॉकी टीम ने चीन को 1-0 से हराकर 44 साल बाद एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीता और लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफाई किया।

भारत अब 16 स्वर्ण, 25 रजत और 35 कांस्य सहित 76 पदकों के साथ पदक तालिका में पांचवें स्थान पर है।

हॉकी में 44 साल बाद फिर गोल्ड
महिला हॉकी फाइनल में भारत ने चीन को 1-0 से हराया।

लालरेम्सियामी के 200वें अंतरराष्ट्रीय मैच में मिली यह जीत ऐतिहासिक बन गई। चीन ने अंतिम मिनटों में पेनल्टी कॉर्नर और अतिरिक्त खिलाड़ी के साथ दबाव बनाया, लेकिन भारतीय डिफेंस ने शानदार बचाव किया। जीत के साथ भारत ने 2028 ओलंपिक का टिकट भी हासिल कर लिया।

9-2 से पिछड़कर 10-9 की सनसनीखेज जीत

कुश्ती में सुजीत कलकल ने पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल फाइनल में ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुदिएव को 10-9 से हराकर गोल्ड जीता।

सुजीत एक समय 2-9 से पीछे थे, लेकिन दूसरे हाफ में जबरदस्त वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। यह इन एशियाई खेलों में भारत का कुश्ती में पहला स्वर्ण रहा।

बॉक्सिंग में भारत की गोल्डन हैट्रिक

भारतीय मुक्केबाजों ने भी रिंग में कमाल किया। लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं के 75 किग्रा वर्ग में चीन की बाओ जी यी को हराकर गोल्ड जीता।

इसके बाद परवीन हुड्डा ने 65 किग्रा में चीनी ताइपे की चेन निएन-चिन को 3-2 से हराया।

अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा फाइनल में दक्षिण कोरिया के किम मिन सियोंग को हराकर भारत के लिए बॉक्सिंग में गोल्ड की हैट्रिक पूरी की।

तीरंदाजी में दक्षिण कोरिया पर ऐतिहासिक जीत

भारतीय महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद पुरुषों की रिकर्व टीम और धीरज बोम्मादेवरा-कुमारी ज्योति की मिश्रित टीम ने रजत पदक हासिल किया।

अन्य खेलों में भी पदकों की बरसात

सेलिंग में नेत्रा कुमानन ने कांस्य पदक जीता। सेपक टकरा में भी भारत ने पुरुष क्वाड्रेंट स्पर्धा में जापान के खिलाफ सेमीफाइनल हारने के बावजूद पदक पक्का किया। गोल्फ में प्रणवी उर्स ने 15-अंडर पार के स्कोर के साथ फाइनल राउंड से पहले बढ़त बनाई।

कुल मिलाकर शुक्रवार भारत के लिए इतिहास, रोमांच, संघर्ष और शानदार वापसी से भरा रहा। महिला हॉकी का 44 साल का इंतजार खत्म होना इस सुनहरे दिन का सबसे यादगार अध्याय बन गया।


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