रायपुर 4 जुलाई / ETrendingIndia / “Khamenei’s funeral to take place after four months: To be buried in Mashhad… Last rites could not be held earlier due to war and security reasons” ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गई हैं। छह दिनों तक चलने वाले राजकीय कार्यक्रमों के बाद 9 जुलाई को उन्हें उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
यह ईरान के इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक माना जा रहा है।
खामेनेई का निधन 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में हुआ था। इसके बाद ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच कई महीनों तक सैन्य संघर्ष जारी रहा, जिसके कारण अंतिम संस्कार तत्काल आयोजित नहीं किया जा सका।
युद्ध के कारण टला अंतिम संस्कार
खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान लगातार युद्ध की स्थिति में रहा। सरकार की प्राथमिकता सैन्य मोर्चे पर जवाबी कार्रवाई और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना थी।
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि अंतिम संस्कार के दौरान बड़े जनसमूह को निशाना बनाकर हमला किया जा सकता है। इसी वजह से अंतिम संस्कार को स्थगित रखा गया।
शव को कोल्ड स्टोरेज में रखा गया
सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया था कि खामेनेई के शव को अस्थायी रूप से दफना दिया गया है, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने इन खबरों का खंडन किया।
अधिकारियों के अनुसार इस्लामी परंपराओं का सम्मान करते हुए शव को रासायनिक तरीके से संरक्षित नहीं किया गया, बल्कि विशेष कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा गया। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि शिया धार्मिक परंपरा के अनुसार ऐसी व्यवस्था स्वीकार्य है।
नजफ और कर्बला में निकलेगी अंतिम यात्रा
कार्यक्रम के अनुसार 7 जुलाई को खामेनेई का पार्थिव शरीर इराक ले जाया जाएगा। 8 जुलाई को नजफ और कर्बला में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। शिया समुदाय के लिए ये दोनों शहर अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। नजफ में इमाम अली का रौजा है, जबकि कर्बला में इमाम हुसैन का पवित्र मजार स्थित है।
दो करोड़ लोगों के जुटने की संभावना
ईरानी प्रशासन का अनुमान है कि अंतिम संस्कार में 1.5 से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। पूरे देश में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। 30 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों, प्रतिनिधियों और लगभग 90 देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।
पाकिस्तान, रूस, चीन सहित कई देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने की पुष्टि की है।
शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा आयोजन
ईरान के धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व के लिए यह अंतिम संस्कार केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि इस्लामी गणराज्य के प्रति जनसमर्थन और राष्ट्रीय एकता के प्रदर्शन का अवसर भी माना जा रहा है।
