Share This Article रायपुर, 21सितंबर 2026 / ETrendingIndia / छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सुदूर और संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों ने पुणे स्थित भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (FTII) का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय सिनेमा की विरासत, आधुनिक फिल्म निर्माण तकनीक और डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप की जानकारी ली। यह भ्रमण PIB रायपुर के विशेष मीडिया प्रेस टूर के तहत आयोजित किया गया। जगदलपुर से नारायणपुर तक के पत्रकार शामिल जगदलपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर के पत्रकारों ने FTII की शैक्षणिक, तकनीकी और व्यावहारिक सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्होंने पारंपरिक फिल्म निर्माण से लेकर आधुनिक डिजिटल तकनीक तक के बदलाव को समझा। FTII कुलपति से संवाद FTII के कुलपति धीरज सिंह ने पत्रकारों से संवाद किया। उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे पत्रकारों के योगदान की सराहना की। उन्होंने डिजिटल फिल्म निर्माण, पटकथा लेखन, मोबाइल पत्रकारिता और कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। प्रभात स्टूडियो में दिखी सिनेमा की विरासत पत्रकारों ने ऐतिहासिक प्रभात स्टूडियो और कैमरा हाउस का भ्रमण किया। यहां पुराने कैमरों और फिल्म निर्माण उपकरणों के माध्यम से एनालॉग और रील आधारित सिनेमा से डिजिटल तकनीक तक की यात्रा को समझने का अवसर मिला। प्रभात फिल्म कंपनी ने संत तुकाराम, दुनिया ना माने और अमृत मंथन जैसी फिल्मों का निर्माण किया था। डिजिटल फिल्म निर्माण की आधुनिक तकनीक आधुनिक स्टूडियो और साउंड सुविधाओं में पत्रकारों को डिजिटल कैमरा, मल्टी-कैमरा सिस्टम, साउंड रिकॉर्डिंग, डबिंग, बैकग्राउंड स्कोर और डिजिटल पोस्ट-प्रोडक्शन की जानकारी दी गई। ‘चंपारण मटन’ की विशेष स्क्रीनिंग भ्रमण के दौरान FTII विद्यार्थियों की चर्चित लघु फिल्म ‘चंपारण मटन’ की विशेष स्क्रीनिंग भी हुई। ग्रामीण जीवन पर आधारित यह फिल्म स्टूडेंट एकेडमी अवार्ड्स के सेमीफाइनल चरण तक पहुंची थी। फिल्म के जरिए स्थानीय कहानियों को प्रभावी दृश्य-श्रव्य माध्यम से बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। पत्रकारों ने बताया ज्ञानवर्धक अनुभव पत्रकारों ने FTII भ्रमण को उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। PIB रायपुर की इस पहल का उद्देश्य दूरदराज और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों को राष्ट्रीय स्तर के मीडिया एवं संचार संस्थानों से जोड़ना और उनके पेशेवर अनुभव को व्यापक बनाना है। Share This Article Post navigation पोलावरम परियोजना : तकनीकी अध्ययन से जुड़े केंद्र पहुंची बस्तर की टीम, समझी बांध निर्माण और जल प्रबंधन की तकनीक