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रायपुर / ETrendingIndia / वैज्ञानिकों ने खोजी अब तक की सबसे शक्तिशाली फ्लेयर

वैज्ञानिकों ने एक सुपरमैसिव ब्लैक होल से निकली ब्लैक होल की रिकॉर्डतोड़ ऊर्जा वाली फ्लेयर देखी है। यह विस्फोट तब हुआ जब एक विशाल तारा ब्लैक होल के अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में फंस गया। इस फ्लेयर की चमक अपने चरम पर सूर्य से लगभग 10 ट्रिलियन गुना अधिक थी।

11 अरब प्रकाश वर्ष दूर की घटना

यह घटना लगभग 11 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक आकाशगंगा में दर्ज की गई। शोधकर्ताओं के अनुसार, संबंधित ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य से करीब 300 मिलियन गुना अधिक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह घटना तब घटी जब एक तारा अपने कक्ष से भटककर ब्लैक होल के बहुत करीब पहुंच गया।

तारा “स्पैगेटिफाइड” होकर नष्ट हुआ

शोधकर्ताओं ने बताया कि जब तारा ब्लैक होल के बहुत पास पहुंचा, तो उसका आकार खिंचकर लंबा और पतला हो गया, जिसे “स्पैगेटिफिकेशन” कहा जाता है। इसके बाद तारे का गैसीय पदार्थ ब्लैक होल के चारों ओर घूमता हुआ भीतर समा गया, जिससे यह ऊर्जा से भरी फ्लेयर उत्पन्न हुई।

दुर्लभ और विशाल तारा था इसका कारण

यह तारा असाधारण रूप से विशाल था — सूर्य के 30 से 200 गुना तक द्रव्यमान वाला। ऐसे तारे बहुत कम बनते हैं और जल्दी समाप्त हो जाते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे तारे ब्लैक होल के पास मौजूद गैस और धूल को आकर्षित कर असामान्य रूप से बड़े हो सकते हैं।

शोध और निष्कर्ष

इस फ्लेयर को कैलिफ़ोर्निया, एरिज़ोना और हवाई की दूरबीनों से देखा गया। वैज्ञानिकों ने अन्य संभावित कारणों जैसे सुपरनोवा, ब्लैक होल से निकलने वाली जेट स्ट्रीम या ग्रेविटेशनल लेंसिंग को खारिज कर दिया। यह घटना 2018 में अपने चरम पर थी और अब भी धीमी हो रही है।

निष्कर्षतः

यह ब्लैक होल की रिकॉर्डतोड़ ऊर्जा वाली फ्लेयर ब्रह्मांड के रहस्यों पर नई रोशनी डालती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसी घटनाएं यह समझने में मदद कर सकती हैं कि ब्लैक होल ऊर्जा को कैसे उत्पन्न और विकीर्ण करते हैं।