रायपुर,09 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “BSP – Coke oven gas leak… seven workers unconscious,…. Joint disaster management mock drill” सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के कोक ओवन एवं कोल केमिकल्स विभाग के सीसीडी-3 (यूनिट-500) में कल गैस रिसाव होने की काल्पनिक परिस्थितियां बनाई गई…
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), अग्निशमन सेवाओं तथा संयंत्र के विभिन्न आंतरिक विभागों की सहभागिता से एक वृहद संयुक्त आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया।
विशेष अभ्यास का मुख्य उद्देश्य
देश की शीर्ष राहत एजेंसियों और संयंत्र प्रबंधन की तैयारियों, आपसी समन्वय तथा त्वरित बचाव क्षमता का कड़ा परीक्षण करना था।
रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम करने की रणनीतियों को परखा
आपदा प्रबंधन के तय मानदंडों के तहत आयोजित इस मॉक ड्रिल के माध्यम से वास्तविक संकट के समय जान-माल की रक्षा और रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम करने की रणनीतियों को परखा गया।
मॉक ड्रिल के दौरान यूनिट-500 के स्क्रबर क्षेत्र में अमोनिया स्क्रबर गैस बायपास वाल्व से कोक ओवन गैस रिसाव की एक काल्पनिक स्थिति (सिमुलेशन) तैयार की गई.
इसके तहत हाइड्रोजन सल्फाईड स्क्रबर आउटलेट गैस लाइन में मरम्मत के दौरान कार्बन मोनोऑक्साइड गैस कार्यस्थल पर फैल गई और वहां कार्यरत आठ में से सात श्रमिक अचेत हो गए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उप महाप्रबंधक (सीसीडी) श्री जी. पी. पटेल ने तत्काल आपातकाल की घोषणा करते हुए प्रभावित क्षेत्र को खाली कराया।
इसके तुरंत बाद महाप्रबंधक (सीसीडी) एवं इंसिडेंट कंट्रोलर श्री आनंद शुक्ला ने घटनास्थल पर पहुंचकर कमान संभाली, जबकि मुख्य महाप्रबंधक (कोक ओवन एवं कोल केमिकल्स) एवं चीफ इंसिडेंट कंट्रोलर श्री तुलाराम बेहरा ने संपूर्ण राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी करते हुए सभी बाहरी व आंतरिक सहभागी एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया।
बचाव अभियान के दौरान एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के अग्निशमन दल ने आधुनिक ‘सेल्फ कंटेन्ड ब्रीदिंग अपरेटस’ (SCBA) से लैस होकर प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश किया और सभी अचेत श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार केंद्र पहुंचाया।
इस दौरान प्लांट कंट्रोल, मुख्य चिकित्सा पोस्ट, गैस सुरक्षा विभाग, सीआईएसएफ और पर्यावरण प्रबंधन सहित अन्य सहयोगी इकाइयों ने संयंत्र की आपदा प्रबंधन योजना के अनुरूप अपने दायित्वों का बेहतरीन निर्वहन किया।
बचाव कार्य पूरा होने के बाद पोर्टेबल गैस डिटेक्टर की मदद से गैस का स्तर सुरक्षित पाए जाने पर ही क्षेत्र को पुनः सामान्य परिचालन के लिए सुरक्षित घोषित किया गया।
इस पूरे अभ्यास का अवलोकन कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) श्री ए. के. चक्रवर्ती, डीआईजी (सीआईएसएफ) श्री एन. एन. त्रिपाठी और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ के अधिकारियों सहित कई वरिष्ठ प्रबंधकों ने किया।
मॉक ड्रिल के सफल समापन के पश्चात मानव संसाधन विकास विभाग (HRDD) में कार्यपालक निदेशक (संकार्य) श्री राकेश कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय ‘पोस्ट मॉक ड्रिल समीक्षा बैठक’ आयोजित की गई।
इस बैठक में सभी सहभागी एजेंसियों और पर्यवेक्षकों ने अभ्यास के दौरान प्राप्त अनुभवों, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों तथा भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता बनाने के सुधारों पर व्यापक चर्चा की।
चेयरमैनशिप कर रहे श्री राकेश कुमार ने सभी एजेंसियों की व्यावसायिक दक्षता, आपसी तालमेल और प्रतिबद्धता की सराहना की, जिसके बाद मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) श्री देबदत्त सतपथी ने आभार ज्ञापित किया।
इस पूरे संयुक्त आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों, विभागीय सुरक्षा अधिकारियों और संयंत्र के ‘सेफ्टी वॉरियर्स’ ने अत्यंत सराहनीय भूमिका निभाई।
