Share This Article रायपुर, 09 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “Muktakash Manch: Artists, writers, and cultural icons honored with Padma and state awards… paid tribute to Teejan Bai…” छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने वाली पंडवानी की महान साधिका, पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई को बुधवार को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर के मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित भव्य सांगीतिक श्रद्धांजलि समारोह में भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। लोककला, साहित्य और संस्कृति जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में स्व. तीजन बाई के जीवन, साधना और उनके अद्वितीय सांस्कृतिक योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री – विष्णुदेव साय की प्रेरणा एवं मंशा के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री – राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। पंडवानी के क्षेत्र में राज्य सम्मान प्रदान किया जाएगा उन्होंने घोषणा की कि पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर पंडवानी कला के क्षेत्र में प्रतिवर्ष राज्य सम्मान प्रदान किया जाएगा। गनियारी ग्राम को कलाग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा उनके जन्मस्थल गनियारी ग्राम को कलाग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा . तंबूरे को महंत घासीदास संग्रहालय में संरक्षित एवं प्रदर्शित किया जाएगा तीजन बाई के प्रिय तंबूरे को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में संरक्षित एवं प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढिय़ां उनकी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा ले सकें। कार्यक्रम में मंत्री – राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय तीजन बाई की पुत्रवधु -मती वेणु देशमुख को एक लाख रुपये की सहायता राशि का चेक भी प्रदान किया। इस अवसर पर -मती वेणु देशमुख ने श्रद्धांजलि समारोह के आयोजन के लिए संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा संस्कृति विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरी लोककला परंपरा का सम्मान है। इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि स्वर कभी मौन नहीं होते। वे समय की सीमाओं को लांघकर युगों तक जनमानस की चेतना में गूंजते रहते हैं। पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का स्वर छत्तीसगढ़ की लोकआत्मा का अमर नाद है, जो आने वाली पीढिय़ों को अपनी संस्कृति, परंपरा और लोकगौरव से सदैव जोड़ता रहेगा। वे केवल एक महान लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की सजीव पहचान थीं। कार्यक्रम के दौरान संस्कृति विभाग के सचिव एस. भारतीदासन तथा संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने स्वर्गीय तीजन बाई के जीवन और कला यात्रा पर आधारित विशेष ब्रोशर का विमोचन किया। सभी अतिथियों ने स्वर्गीय तीजन बाई के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। संस्कृति विभाग द्वारा उनके जीवन पर आधारित वृत्तचित्र का भी प्रदर्शन किया गया. सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत लोक कलाकार पुष्पा निषाद के पंडवानी गायन से हुई। इसके बाद स्वर्गीय तीजन बाई की शिष्याएं तरूणा साहू और आराध्या साहू तथा दुर्गा साहू ने कापालिक शैली में प्रभावशाली पंडवानी प्रस्तुति देकर अपनी गुरु को श्रद्धासुमन अर्पित किए। दुष्यंत द्विवेदी ने वेदमती शैली में पंडवानी गायन प्रस्तुत कर कार्यक्रम को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने स्वर्गीय तीजन बाई से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व और कला साधना को याद किया। अनेक वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। इस अवसर पर कलाकारों ने स्वर्गीय तीजन बाई को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किए जाने तथा उनके नाम पर पंडवानी एवं सांस्कृतिक विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग भी रखी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा मोना सेन, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्रकार, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज, यूसीसी सदस्य मोहन पवार सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। साहित्य जगत से डॉ. पी.सी. लाल यादव, परदेशीराम वर्मा, डॉ. सुशील त्रिवेदी तथा कला जगत से पद्म- ममता चंद्राकर, पद्म- भारती बंधु, पद्म- उषा बारले, पद्म- राधेश्याम बारले, मीर अली मीर, निर्मला ठाकुर, मोक्षदा चंद्राकर, – सुनील सोनी, किरण शर्मा, कविता वासनिक, राकेश तिवारी, सरस्वती बारले, वंदना बारले, दुर्गा साहू, इतिहासकार आचार्य रमेन्द्रनाथ मिश्र, अशोक तिवारी, छत्तीसगढ़ी वाद्ययंत्रों के संग्रहकर्ता रिखी क्षत्रीय, चेतन देवांगन, रत्ना पांडे तथा सुधीर शर्मा सहित बड़ी संख्या में कलाकार और साहित्यकार उपस्थित रहे। मंच का संचालन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा तथा अरुण निर्मलकर ने किया। समारोह के अंत में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा मोना सेन ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई ने अपने स्वर से केवल पंडवानी को नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व मंच तक पहुंचाया। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनकी लोककला, उनकी परंपरा और उनके मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। Share This Article Post navigation BSP – कोक ओवन गैस रिसाव… सात श्रमिक अचेत,…. संयुक्त आपदा प्रबंधन का मॉक ड्रिल CG Weather Alert : छत्तीसगढ़ में मौसम ने ली करवट…! अगले 4 दिन बारिश का दौर…इन जिलों में गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी