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रायपुर, 8 नवंबर 2026। ETrendingIndia / ऑस्ट्रेलिया में जहरीले केन टोड (Cane Toad) के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए खनन कंपनी रियो टिंटो करीब 185 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

कंपनी कर्टिन विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के साथ मिलकर पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्षेत्र में 7,500 वर्ग किलोमीटर का विशेष नियंत्रण क्षेत्र बनाएगी। इसका उद्देश्य इस जहरीले जीव को आगे फैलने से रोकना और स्थानीय वन्यजीवों की रक्षा करना है।

क्यों खतरनाक है केन टोड?

केन टोड ऑस्ट्रेलिया की आक्रामक विदेशी प्रजातियों में शामिल है। इसे 1935 में गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को नियंत्रित करने के लिए लाया गया था।

लेकिन बाद में यह खुद पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या बन गया। इसकी त्वचा से निकलने वाला विष इसे खाने वाले सांप, गोह और अन्य वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

ऐसे रोका जाएगा फैलाव

परियोजना के तहत पानी के कृत्रिम स्रोतों में बदलाव किया जाएगा, ताकि मेंढकों को सूखे मौसम में पानी न मिल सके। छह पशुपालन केंद्रों में 685 जल संरचनाओं को सुरक्षित या परिवर्तित किया जाएगा। इससे लगभग 7,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पानी रहित अवरोध तैयार होगा। परियोजना का काम 2027 से शुरू होगा।

पिलबारा की जैव विविधता बचाने की कोशिश

वैज्ञानिकों के अनुसार, केन टोड के पहुंचने से क्षेत्र की करीब 25 स्थानीय प्रजातियां प्रभावित हो सकती हैं। यह पहल आदिवासी समुदायों, वैज्ञानिकों और पशुपालकों के सहयोग से पूरी की जाएगी।


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