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रायपुर, 08 अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / छत्तीसगढ़ के हथकरघा, हस्तशिल्प और अपैरल उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए रायपुर में निर्यात संवर्धन एवं डिजाइन विकास कार्यशाला आयोजित की गई।

प्रदेश से वर्तमान में करीब 47 करोड़ रुपये के स्थानीय हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों का निर्यात हो रहा है, जिसे अगले तीन वर्षों में 100 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

लोकल उत्पादों को मिलेगा ग्लोबल बाजार

कार्यशाला में कोसा-सिल्क, हथकरघा, हस्तशिल्प और माटीकला उत्पादों की निर्यात संभावनाओं पर चर्चा हुई।

महिलाओं, युवाओं और नए उद्यमियों को निर्यात कारोबार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

निर्यात प्रक्रिया और वित्तीय सहायता की जानकारी

विशेषज्ञों ने निर्यात लाइसेंस, निर्यात प्रक्रिया, क्रेडिट गारंटी और वित्तीय सुविधाओं की जानकारी दी।

उद्योग विभाग और एमएसएमई मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं एवं औद्योगिक नीति के तहत मिलने वाली सहायता से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।

पारंपरिक कला में आधुनिक डिजाइन का मेल

हथकरघा संघ के अध्यक्ष श्री भोजराज देवांगन ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्री राजेश सिंह राणा ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला.

डीजीएफटी नागपुर के संयुक्त निदेशक एवं उद्योग विभाग के अधिकारियों द्वारा छत्तीसगढ़ में हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट एवं अपैरल क्षेत्र में निर्यात की संभावनाओं के साथ निर्यात प्रक्रिया और निर्यात लाइसेंस संबंधी जानकारी दी।

खैरागढ़ स्थित कला-संगीत विश्वविद्यालय की राजकुमारी इंदिरा सिंह द्वारा ‘पारंपरिक डिजाइनों का आधुनिक रूपांतरण’ विषय पर मार्गदर्शन दिया गया।

पारंपरिक डिजाइनों को उनकी मौलिकता बरकरार रखते हुए आधुनिक बाजार के अनुरूप विकसित करने पर भी मार्गदर्शन दिया गया।

निर्यात बढ़ाने पर फोकस

कार्यशाला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों को निर्यात की प्रक्रिया और सरकारी सहायता की जानकारी देकर उनके उत्पादों की देश-विदेश में पहुंच बढ़ाना है।

अधिकारियों ने निर्यात से जुड़ी समस्याओं के समाधान में विभागीय सहयोग का भरोसा भी दिलाया।


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