Share This Article “जर्मन चिड़िया नेभारतीय चिड़िया से पूछा” “क्या तुम भी मेरी तरहभयमुक्त उड़ती हो?” भारतीय चिड़िया मुस्कुराई। “उड़ना तो जन्म से जानती हूँ,पर भय भी मेरे साथ ही जन्मा है। तुम्हारे लिएआकाश एक विस्तार है,मेरे लिएएक परीक्षा। तुम पंखों से उड़ती हो,मैं स्मृतियों से। तुम्हें ऊँचाई मापनी होती है,मुझे सुरक्षित लौटना। थोड़ी देर मौन रहा आकाश। फिर भारतीय चिड़िया ने पूछा “और तुम?क्या सचमुच भयमुक्त हो?” जर्मन चिड़िया ठिठक गई। बोली- “भय हर देश में जन्म लेता है,बस उसका नाम बदल जाता है। कहीं शिकारी बाहर होते हैं,कहीं भीतर। कहीं पिंजरे लोहे के होते हैं,कहीं विचारों के। और सबसे गहरा पिंजरा वह हैजिसकी सलाखें दिखाई नहीं देतीं। स्वतंत्रतासिर्फ़ पंखों का गुण नहीं,चेतना की अवस्था है। जिस दिन मनुष्यदूसरे की उड़ान सेडरना छोड़ देगा,उसी दिनधरती पर पहली बारआकाश जन्म लेगा। रायपुर,04 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / -मनोज मौर्य रचयिता.. लगभग 20 वर्षों से माया नगरी मुंबई में फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, कथाकार, गीतकार, लेखक के रूप में स्थापित मनोज मौर्य किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आपने कई फिल्मों का निर्देशन किया है। अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित मनोज जी को फाइन आर्ट, पेंटिंग्स, पर्यटन आदि इत्यादि के शौक और घुमक्कड़ मिज़ाज ने इन्हें अनुभवों की खान बना दिया है। उनकी कविताएं अपने आप संवेदनशील हृदय के द्वार से जैसे हवा की मानिंद बहने लगती हैं। आज के माहौल की मनःस्थिति को बयां करती ये कविता उसी की एक बानगी है…. Share This Article Post navigation छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा मंच… वार्षिक आयोजनों के लिए कलाकारों से आवेदन आमंत्रित पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को अंतिम विदाई : उनके सम्मान में गनियारी शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का होगा नामकरण …