Chirayu Yojana 2026Chirayu Yojana 2026
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रायपुर, 20 सितंबर 2026। Chirayu Yojana 2026 : समय पर हुई स्वास्थ्य जांच किसी बच्चे की पूरी जिंदगी बदल सकती है। धमतरी के नन्हे भाव्यांश साहू की कहानी इसका एक उदाहरण है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत संचालित चिरायु योजना के जरिए जन्मजात हृदयरोग की समय पर पहचान हुई और बच्चे को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की सफल सर्जरी के बाद भाव्यांश अब स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट चुका है।

आंगनबाड़ी में हुई जांच, डॉक्टरों ने पहचान लिया दिल का रोग

कहानी की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई, जब शहरी चिरायु टीम धमतरी ने जालमपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-01 में बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच की। इसी दौरान डॉक्टरों ने भाव्यांश में जन्मजात हृदयरोग के लक्षणों की पहचान की। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम ने बिना देरी किए बच्चे को उच्च स्तरीय उपचार के लिए श्री सत्य साईं अस्पताल, नया रायपुर रेफर किया।

विशेषज्ञों ने जांच के बाद लिया सर्जरी का फैसला

नया रायपुर स्थित अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भाव्यांश की विस्तृत जांच और आवश्यक परामर्श किया। जांच के बाद उसकी हृदय सर्जरी करने का निर्णय लिया गया। चिरायु टीम ने उपचार की प्रक्रिया में परिवार का मार्गदर्शन और सहयोग भी किया, जिससे बच्चे को समय पर उपचार मिल सका।

2 सितंबर को हुई सफल हार्ट सर्जरी

भाव्यांश को 31 अगस्त 2026 को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद 2 सितंबर को विशेषज्ञ कार्डियक सर्जनों की टीम ने उसकी सफल हृदय सर्जरी की। सर्जरी के बाद चिकित्सकों की निगरानी में बच्चे की लगातार देखभाल की गई और उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ।

9 सितंबर को स्वस्थ होकर घर लौटा मासूम

इलाज और देखभाल के बाद भाव्यांश की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। 9 सितंबर 2026 को उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अब वह सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। परिवार के लिए बच्चे की खिलखिलाती मुस्कान इलाज की सफलता और समय पर मिली मदद की बड़ी खुशी बन गई है।

जन्म से 18 साल तक बच्चों के लिए जीवनरक्षक पहल

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात विकृतियों, गंभीर बीमारियों और पोषण संबंधी कमियों की समय रहते पहचान करना और उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है। भाव्यांश के मामले में भी आंगनबाड़ी स्तर पर हुई जांच, चिरायु टीम की तत्परता और विशेषज्ञ चिकित्सकों के उपचार के बीच बेहतर समन्वय से समय पर इलाज संभव हुआ।


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