Share This Article चुप! चुप! चुप!बोलने का अधिकार नहीं है,मेरे सत्ता के किताब मेंतेरा कोई विचार नहीं है। जब भी हम पेड़ काटेंतुम चुप रहो, डाटा फ्री मिल रहा हैमौज में फिरो।जब भी हमतुम्हारे विचारों का दमन करेंतुम चुप रहो, दोस्तों के साथ बैठकरचिल करो… चुप रहो। जब खेतों की मिट्टीकारखानों में बिक जाए,नदियाँ काली होकरअपना चेहरा छुपाएँ,तुम बस रील्स बनाओ,ट्रेंडिंग गाने लगाओ,और कमेंट में लिखोएवरीथिंग इज़ फाइन…चुप रहो। जब सच कोब्रेकिंग न्यूज़ में काट दिया जाए,और झूठ कोराष्ट्रभक्ति का जामा पहनाया जाए,तुम क्लैप करो,इमोजी बरसाओ,और अपने भीतर के डर कोदेशप्रेम बताओ…चुप रहो। जब किताबों से सवाल हटें,और दिमागों में ताले जड़ें,जब इतिहास कोफोटोशॉप से सजाया जाए,तुम बस फॉरवर्ड करो,बिना पढ़े सपोर्ट करो,ज्ञान से ज्यादानैरेटिव पर भरोसा करो…चुप रहो। जब नौकरीमोटिवेशन स्पीच में बदल जाए,और भूख“पॉज़िटिव थिंकिंग” कहलाए,जब युवा की जेब खाली होटाइमलाइन देशभक्ति से भरी हो,तुम सेल्फी लो,फिल्टर लगाओ,और कैप्शन लिखो“प्राउड टू बी साइलेंट।”चुप रहो। क्योंकि सवाल पूछनाअब असभ्यता है,सोचनालगभग देशद्रोह है,और इंसान होनासबसे बड़ा जोखिम।चुप रहो। चुप कविता रायपुर, 24 मई 2026/ ETrendingIndia / मनोज मौर्य रचयिता.. लगभग 20 वर्षों से माया नगरी मुंबई में फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, कथाकार, गीतकार, लेखक के रूप में स्थापित मनोज मौर्य किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आपने कई फिल्मों का निर्देशन किया है। अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित मनोज जी को फाइन आर्ट, पेंटिंग्स, पर्यटन आदि इत्यादि के शौक और घुमक्कड़ मिज़ाज ने इन्हें अनुभवों की खान बना दिया है। उनकी कविताएं अपने आप संवेदनशील हृदय के द्वार से जैसे हवा की मानिंद बहने लगती हैं। आज के माहौल की मनःस्थिति को बयां करती ये कविता उसी की एक बानगी है…. Share This Article Post navigation छोटे छोटे लक्ष्य बनाओ… ‘अपनापन’ केवल पुस्तक नहीं, बल्कि संगठन, समर्पण, संघर्ष और नेतृत्व की कार्यशैली को समझने का दस्तावेज है – मुख्यमंत्री डॉ. यादव