Share This Article रायपुर, 01 सितम्बर2026/ ETrendingIndia / दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद चुनाव आयोग ने सोमवार को मसौदा मतदाता सूची जारी कर दी। पुनरीक्षण के दौरान राजधानी के करीब 1.47 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47.58 लाख नाम मसौदा सूची से बाहर किए गए हैं। इसके बाद दिल्ली में करीब 97.51 लाख मतदाताओं के नाम मसौदा सूची में शामिल हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि मसौदा सूची पर मतदाताओं से प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच की जाएगी। नोटिस जारी करने और उनके निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया 30 जून से 17 अगस्त तक चली। इस दौरान करीब 97.51 लाख मतदाताओं के गणना प्रपत्र प्राप्त हुए, जो राजधानी के कुल मतदाताओं का लगभग 67 प्रतिशत है। वहीं करीब 47.58 लाख मतदाताओं के प्रपत्र प्राप्त नहीं हुए। रिपोर्ट के अनुसार इनमें ऐसे मतदाता शामिल हैं जो अपने पते पर नहीं मिले, किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनके नाम मतदाता सूची में एक से अधिक बार दर्ज पाए गए। इसका अर्थ है कि दिल्ली की मसौदा मतदाता सूची में लगभग हर तीन में से एक मतदाता का नाम बाहर हो गया है। हालांकि, इसे अंतिम सूची से पहले की प्रक्रिया माना जा रहा है और पात्र मतदाताओं को अपना नाम शामिल कराने का अवसर दिया गया है। मतदाता सबसे पहले चुनाव आयोग की आधिकारिक मतदाता खोज वेबसाइट पर जाकर मसौदा सूची में अपना नाम जांच सकते हैं। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम मसौदा सूची में नहीं है तो वह प्रपत्र-6 के माध्यम से नाम शामिल कराने का दावा कर सकता है। इसके लिए चुनाव अधिकारियों द्वारा मांगे गए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। चुनाव आयोग ने 30 सितंबर तक सहायक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने की अनुमति दी है। इसके बाद प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच की जाएगी। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी और गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण में भी अंतर देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रोहिणी विधानसभा क्षेत्र में करीब 83.43 प्रतिशत गणना प्रपत्रों का डिजिटलीकरण किया गया। इसके विपरीत दक्षिण-पूर्व दिल्ली के तुगलकाबाद विधानसभा क्षेत्र में यह आंकड़ा सबसे कम 52.15 प्रतिशत रहा। संशोधित मतदाता सूची तैयार करने के लिए अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया। इस दौरान जो मतदाता उपलब्ध नहीं मिले या जिनका गणना प्रपत्र जमा नहीं हो सका, उन्हें दावा और आपत्ति प्रक्रिया के माध्यम से अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का अवसर दिया गया है। इसलिए मसौदा सूची से नाम बाहर होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हट गया है। पात्र मतदाता निर्धारित अवधि में दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं से उनकी पात्रता और जन्म संबंधी जानकारी के आधार पर दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे व्यक्ति को अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान प्रमाणित करने वाला दस्तावेज प्रस्तुत करना पड़ सकता है।1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे व्यक्ति से उसके स्वयं के साथ-साथ माता या पिता में से किसी एक से संबंधित दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। वहीं 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्ति को अपने दस्तावेजों के साथ दोनों अभिभावकों से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं।पात्रता के अतिरिक्त सत्यापन के मामले में केवल आधार कार्ड को पर्याप्त दस्तावेज नहीं माना जाएगा। आवश्यकता पडऩे पर चुनाव अधिकारियों द्वारा निर्धारित अन्य सहायक दस्तावेज भी प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। अब दावा और आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित सूची तैयार की जाएगी और 4 नवंबर को दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। Share This Article Post navigation बीमा कंपनी का अधिकारी बनकर महिला पुलिस निरीक्षक से 5.4 लाख की साइबर ठगी