रायपुर, 29 जुलाई / ETrendingIndia / एथनॉल मिश्रित (ई-20) पेट्रोल को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने 4 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और संसद घेराव की चेतावनी दी है।
संगठन का आरोप है कि ई-20 पेट्रोल से पुराने वाहनों का माइलेज घट रहा है, इंजन पर असर पड़ रहा है और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है।
वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि एथनॉल मिश्रण से कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय में वृद्धि और प्रदूषण घटाने में मदद मिल रही है।
4 अगस्त को जंतर-मंतर से संसद तक प्रदर्शन…
दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने ऐलान किया है कि 4 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद संसद घेराव किया जाएगा। इसमें टैक्सी, ऑटो और टूरिस्ट वाहन चालक बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
एसोसिएशन की प्रमुख आपत्तियां
ई-20 पेट्रोल से कई वाहनों का माइलेज कम होने का दावा।
इंजन पर प्रतिकूल प्रभाव और रखरखाव खर्च बढ़ने की शिकायत।
वर्ष 2015 से पहले बने कई वाहन ई-20 के अनुकूल नहीं होने का आरोप।
गन्ने से बने एथनॉल को खाद्यान्न संसाधनों से जोड़ते हुए नीति पर सवाल।
सरकार से क्या मांग ?
संगठन ने केंद्र सरकार से एथनॉल मिश्रित पेट्रोल की स्वतंत्र, वैज्ञानिक और निष्पक्ष समीक्षा कराने तथा वाहन निर्माताओं और विशेषज्ञों की राय लेकर नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार की एथनॉल ब्लेंडिंग नीति का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और गन्ना किसानों को अतिरिक्त आय उपलब्ध कराना है। सरकार चरणबद्ध तरीके से ई-20 ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दे रही है।
क्यों अहम है यह मुद्दा ?
एक ओर सरकार एथनॉल मिश्रण को ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम मान रही है, वहीं परिवहन संगठनों का एक वर्ग पुराने वाहनों पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जता रहा है। ऐसे में यह मुद्दा अब सड़क से संसद तक पहुंचने की तैयारी में है।
