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मुंबई, 15 सितंबर 2026। Tata Sons : टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से जारी खींचतान अब एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट दायर कर अपनी कानूनी तैयारी मजबूत कर ली है। यह कदम ऐसे समय आया है जब RBI ने हाल ही में टाटा संस की Certificate of Registration (CoR) सरेंडर करने की अर्जी भी खारिज कर दी थी। घटनाक्रम के बीच मंगलवार को टाटा ग्रुप की कुछ कंपनियों के शेयरों में 20% तक की तेजी देखने को मिली।

RBI ने हाईकोर्ट में क्यों दायर की कैविएट?

RBI की कैविएट का सीधा मतलब है कि अगर टाटा संस की CoR या लिस्टिंग से जुड़े मामले में कोई पक्ष बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचता है, तो अदालत RBI का पक्ष सुने बिना एकतरफा आदेश जारी न करे। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने टाटा संस को भी इस कैविएट की जानकारी दे दी है। इससे संकेत मिलता है कि RBI संभावित कानूनी चुनौती के लिए पहले से अपनी स्थिति तैयार रखना चाहता है।

11 सितंबर के फैसले ने फिर बढ़ाई हलचल

RBI ने 11 सितंबर को टाटा संस की Certificate of Registration सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी। कंपनी ने अनरजिस्टर्ड Core Investment Company (CIC) के तौर पर वर्गीकृत होने के लिए यह आवेदन किया था। अर्जी खारिज होने के बाद टाटा संस के अपर-लेयर NBFC से जुड़े रेगुलेटरी नियमों के दायरे में बने रहने का रास्ता साफ माना जा रहा है। यही वजह है कि कंपनी की संभावित लिस्टिंग का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।

अपर-लेयर NBFC नियमों में फंसा लिस्टिंग का पेंच

टाटा संस को RBI की अपर-लेयर Non-Banking Financial Companies की सूची में शामिल किया गया है। इस श्रेणी की कंपनियों पर अपेक्षाकृत कड़े नियामकीय नियम लागू होते हैं और लिस्टिंग से जुड़ी शर्त भी इसमें अहम है। ऐसे में एक तरफ टाटा संस को निजी कंपनी बनाए रखने की इच्छा और दूसरी तरफ RBI के नियामकीय ढांचे के बीच संतुलन का सवाल बना हुआ है। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम से यह तय नहीं होता कि टाटा संस की लिस्टिंग निश्चित रूप से होगी।

2022 से जारी है टाटा संस और RBI का मामला

RBI ने 2022 में अपर-लेयर NBFC की सूची जारी की थी, जिसमें टाटा संस को Core Investment Company के तौर पर शामिल किया गया था। जून 2026 में NBFC के वर्गीकरण के लिए नया principle-based framework लाया गया, जिसने पहले की parametric methodology की जगह ली। इसके बाद 6 अगस्त को संशोधित अपर-लेयर NBFC सूची जारी हुई और टाटा संस उसमें भी बनी रही। उस समय RBI ने कहा था कि कंपनी को सूची में बनाए रखना उसकी de-registration अर्जी के नतीजे को प्रभावित नहीं करता, क्योंकि आवेदन उस समय जांच के अधीन था।

टाटा ग्रुप के शेयरों में क्यों आया 20% तक उछाल?

RBI की कानूनी कार्रवाई और CoR आवेदन खारिज होने की खबरों के बीच मंगलवार को टाटा केमिकल्स और टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन समेत कुछ टाटा ग्रुप कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल आया। बाजार के कुछ हिस्सों में इसे टाटा संस की संभावित लिस्टिंग से मिलने वाले फायदे की उम्मीद से जोड़कर देखा गया। हालांकि, शेयरों में तेजी को टाटा संस की लिस्टिंग का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता। कंपनी की लिस्टिंग को लेकर अभी नियामकीय और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ना बाकी है।


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