One Station One Product
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रायपुर 27 मार्च 2026 / ETrendingIndia / One Station One Product: Local Heritage gets new platform at railway stations / एक स्टेशन एक उत्पाद योजना , भारत में रेलवे स्टेशनों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब ये सिर्फ यात्रा के केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय कला, संस्कृति और उत्पादों को बढ़ावा देने के बड़े मंच बनते जा रहे हैं। केंद्र सरकार की “एक स्टेशन एक उत्पाद” (ओएसओपी) योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसकी शुरुआत 25 मार्च 2022 को की गई थी।

योजना का उद्देश्य और विस्तार

ओएसओपी योजना का मुख्य लक्ष्य स्थानीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों (SHG) और छोटे उद्यमियों को बाजार उपलब्ध कराना है।

इसके तहत रेलवे स्टेशनों पर विशेष स्टॉल लगाए जाते हैं, जहां क्षेत्रीय उत्पाद बेचे जाते हैं।

देश के 2,000 से अधिक स्टेशनों पर लगभग 2,326 आउटलेट स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे 1.32 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार और आय के अवसर मिले हैं।

स्थानीय उत्पादों को मिल रहा बढ़ावा

इस योजना के तहत हर स्टेशन पर उस क्षेत्र की खास पहचान वाले उत्पाद प्रदर्शित किए जाते हैं –

तमिलनाडु के तेनकासी में गन्ने से बने उत्पाद

बिहार के पटना स्टेशन पर मधुबनी पेंटिंग

पश्चिम बंगाल के आसनसोल में हस्तशिल्प और कालीन

ओडिशा के बलांगीर में हस्तनिर्मित खिलौने

राजस्थान के जयपुर में सांगानेरी प्रिंट वस्त्र

ये उत्पाद यात्रियों को स्थानीय संस्कृति से जोड़ते हैं और उन्हें स्मृति चिन्ह के रूप में खरीदने का अवसर देते हैं।

महिलाओं और ग्रामीण कारीगरों को लाभ

ओएसओपी योजना में विशेष रूप से महिलाओं, बुनकरों, किसानों और ग्रामीण कारीगरों को प्राथमिकता दी जाती है। इससे उन्हें सीधे ग्राहकों तक पहुंच मिलती है और उनकी आय में वृद्धि होती है।

यह योजना आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ को मजबूत करती है।

रेलवे स्टेशन बने संस्कृति और व्यापार के केंद्र

अब रेलवे स्टेशन केवल आवागमन का स्थान नहीं रह गए हैं, बल्कि यहां संस्कृति, व्यापार और समुदाय का संगम देखने को मिलता है। यात्री जहां स्थानीय उत्पाद खरीदते हैं, वहीं कारीगरों को पहचान और स्थायी आजीविका मिलती है।