नई दिल्ली, 30 मई 2026/ Why doesn’t Fevikwik…which sticks everything together…stick to its own bottle? Discover the science behind it.
Fevikwik Mystery : फेवीक्विक का नाम सुनते ही दिमाग में ऐसे गोंद की तस्वीर आती है, जो पलभर में टूटी चीजों को जोड़ देता है। प्लास्टिक, रबर, लकड़ी या मेटल…इसकी एक बूंद काफी होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो गोंद हर चीज को तुरंत चिपका देता है, वह अपनी ही बोतल से क्यों नहीं चिपकता? इसके पीछे छिपा है बेहद दिलचस्प विज्ञान।
फेवीक्विक में होता है खास केमिकल
फेवीक्विक में मुख्य रूप से साइनोएक्रिलेट (Cyanoacrylate) नाम का केमिकल होता है। यही इसे सुपरफास्ट ग्लू बनाता है। इसकी खासियत यह है कि यह हवा में मौजूद नमी के संपर्क में आते ही तेजी से रिएक्ट करता है और सख्त होकर चीजों को जोड़ देता है।
जब फेवीक्विक किसी सतह पर लगाया जाता है, तो वह हवा की नमी से संपर्क में आकर पॉलीमराइजेशन प्रक्रिया शुरू कर देता है। इसी वजह से यह कुछ ही सेकंड में मजबूत पकड़ बना लेता है। यानी फेवीक्विक को चिपकने के लिए नमी की जरूरत होती है।
फिर बोतल के अंदर क्यों नहीं जमता?
असल राज इसकी पैकेजिंग में छिपा है। फेवीक्विक की बोतल इस तरह डिजाइन की जाती है कि उसके अंदर नमी प्रवेश न कर सके। पैकिंग के दौरान बोतल के अंदर बेहद सूखा वातावरण रखा जाता है। जब तक साइनोएक्रिलेट को पर्याप्त नमी नहीं मिलती, तब तक वह स्थिर रहता है और चिपकने की प्रक्रिया शुरू नहीं होती।
ढक्कन पर क्यों जम जाता है गोंद?
आपने देखा होगा कि कई बार फेवीक्विक का ढक्कन चिपक जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस्तेमाल के दौरान थोड़ी मात्रा बाहर रह जाती है और हवा की नमी के संपर्क में आकर सख्त हो जाती है। इसीलिए इस्तेमाल के बाद ढक्कन तुरंत और अच्छी तरह बंद करने की सलाह दी जाती है।
युद्ध के दौरान हुई थी खोज
दिलचस्प बात यह है कि साइनोएक्रिलेट (The Fevikwik Mystery) की खोज चिपकाने वाला गोंद बनाने के लिए नहीं हुई थी। सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान वैज्ञानिक पारदर्शी सामग्री बनाने की कोशिश कर रहे थे, तभी यह केमिकल मिला। बाद में इसकी तेज चिपकने वाली क्षमता को पहचानकर इसे सुपर ग्लू के रूप में बाजार में उतारा गया।
