रायपुर 14 नवम्बर 2025 / ETrendingIndia / Health camp becomes a ray of hope amidst dense forests / जंगलों में स्वास्थ्य शिविर , सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक के चिंतलनार और बुरकापाल जैसे दूरस्थ व पहुंचविहीन क्षेत्रों में हाल ही में आयोजित तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर ग्रामीण आबादी के लिए किसी आशा की नई कहानी से कम नहीं रहा।
नियद नेल्लानार योजना के तहत पेड़ों की छांव में सजा यह शिविर उन परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाएं लेकर पहुँचा, जो वर्षों से बुनियादी इलाज के इंतजार में थे।
पहुँच से दूर क्षेत्रों में पहुंची जीवन बचाने वाली सेवाएं
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपेश चंद्राकर और उनकी टीम ने जंगलों के बीच डेरा डाल कर सैकड़ों ग्रामीणों की जांच, उपचार और दवाइयों की निःशुल्क उपलब्धता सुनिश्चित की। ग्रामीणों के लिए यह पहली बार था जब डॉक्टरों की टीम सीधे उनके द्वार तक पहुंची और उन्हें बिना किसी परेशानी के उपचार मिला।
आयुष्मान कार्ड बने ग्रामीणों का सुरक्षा कवच
इस शिविर ने ग्रामीणों को एक और बड़ा तोहफ़ा दिया—162 लोगों के नए आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाए गए और कई ग्रामीणों को कार्ड भी बांटे गए। इससे अब गंभीर बीमारियों के उपचार का भरोसा भी इन परिवारों को मिला है। आर्थिक तंगी के कारण अस्पताल पहुंचने से डरने वाले लोग अब निःशुल्क इलाज की सुविधा से सशक्त महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों के चेहरों पर दिखी खुशी इस पहल की सफलता को बयां करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर न केवल स्वास्थ्य जांच का अवसर देते हैं, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ से भी जोड़ते हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के “नियद नेल्लानार योजना“ के विजन और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देशों पर चल रही यह पहल यह साबित करती है कि सही संकल्प और समन्वय से दुर्गम जंगलों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की रौशनी पहुँच सकती है। यह शिविर उन अंचलों के लिए मिसाल बन गया है, जहाँ कभी स्वास्थ्य सेवा पहुँच पाना सपना माना जाता था।
