Greenland Deal: Trump’s bold claim—US to gain ‘permanent control’ over Greenland’s security; Denmark says sovereignty will remain intact.Greenland Deal
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वाशिंगटन, 20 सितंबर। Greenland Deal : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक नए सुरक्षा समझौते की घोषणा की है। ट्रंप ने दावा किया है कि इस समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर “स्थायी नियंत्रण” मिलेगा। हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित समझौता डेनमार्क की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता तथा ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देता है। समझौते के विस्तृत प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और इसके लागू होने के लिए आवश्यक संसदीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

ट्रंप ने कहा- अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर मिलेगा स्थायी नियंत्रण

ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया मंच Truth Social पर समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका के पास ग्रीनलैंड की सुरक्षा और रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की स्थायी क्षमता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड में बड़ी सैन्य मौजूदगी स्थापित करने की योजना पर तुरंत काम शुरू करेगा। ट्रंप के अनुसार, किसी अमेरिकी विरोधी को वहां सैन्य अड्डा बनाने, सैन्य मौजूदगी रखने या संवेदनशील निवेश करने की अनुमति नहीं होगी।

डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने संप्रभुता को लेकर स्थिति साफ की

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने समझौते को साझा सुरक्षा मजबूत करने वाला कदम बताया है। डेनमार्क सरकार के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि समझौता आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करेगा और साथ ही डेनमार्क के साम्राज्य की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता तथा ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देगा।

इसका मतलब यह है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार ग्रीनलैंड का स्वामित्व अमेरिका को हस्तांतरित नहीं किया जा रहा है। ग्रीनलैंड डेनमार्क के साम्राज्य का हिस्सा बना रहेगा, जबकि अमेरिका की सुरक्षा और सैन्य भूमिका का विस्तार प्रस्तावित है। समझौते की वास्तविक शर्तों को लेकर अभी कई विवरण सार्वजनिक नहीं हुए हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हो सकता है औपचारिक हस्ताक्षर

डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच समझौते पर अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकार ने स्पष्ट किया है कि हस्ताक्षर के बाद भी समझौता तुरंत लागू नहीं होगा, बल्कि संबंधित राष्ट्रीय संसदीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री नील्सन ने इसे ग्रीनलैंड के हितों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में उसकी भूमिका को मान्यता देने वाला समझौता बताया है। वहीं ट्रंप ने समझौते को लंबे समय तक प्रभावी रहने वाला बताया है, लेकिन इसकी अंतिम कानूनी अवधि और विस्तृत प्रावधान आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होंगे।

आर्कटिक में बढ़ेगी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी

ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति इसे आर्कटिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। अमेरिका पहले से ही वहां पिटुफिक स्पेस बेस संचालित करता है। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को और बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाने की बात कही गई है। साथ ही गैर-नाटो विरोधी देशों को ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डे स्थापित करने या संवेदनशील निवेश करने से रोकने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

हालांकि, समझौते का पूरा पाठ अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए अमेरिका को वास्तविक रूप से कितने अधिकार मिलेंगे, सैन्य मौजूदगी कितनी बढ़ेगी और विदेशी नीति या संसाधनों से जुड़े मामलों में कोई औपचारिक अधिकार अमेरिका को मिलेगा या नहीं, इन सवालों का अंतिम जवाब दस्तावेज जारी होने और संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

ग्रीनलैंड पर पुराने तनाव के बीच आया नया समझौता

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप और डेनमार्क के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। ट्रंप पहले भी ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व और अमेरिकी सुरक्षा हितों पर जोर देते रहे हैं। नए समझौते की घोषणा ऐसे समय हुई है जब आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा, सैन्य गतिविधियों और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों का ध्यान बढ़ा हुआ है।


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