Trump-Russia Sanctions Bill: Path cleared for 100% tariffs on India; mounting pressure over oil purchases from Russia; Modi government responds.Trump-Russia Sanctions Bill: Path cleared for 100% tariffs on India; mounting pressure over oil purchases from Russia; Modi government responds.
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वाशिंगटन, 20 सितंबर। Trump Russia Sanctions Bill : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े व्यापक कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिलता है। भारत और चीन इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं, हालांकि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ अपने आप लागू नहीं हुआ है।

262-159 वोट से पास हुआ था बिल, अब बना कानून

अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 16 सितंबर को इस विधेयक को 262-159 के वोट से मंजूरी दी थी। इसके बाद ट्रंप ने 18 सितंबर को इस पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दिया। कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा और अन्य आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना तथा यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को मिलने वाले वित्तीय संसाधनों को सीमित करना है। इसमें रूस से जुड़े अधिकारियों, संस्थाओं और ऊर्जा क्षेत्र पर अतिरिक्त प्रतिबंधों के साथ ईरान से जुड़े मौजूदा प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाने के प्रावधान हैं।

कानून के तहत रूसी सामान पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ और रूस से तेल-गैस खरीद जारी रखने वाले संबंधित देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, इन प्रावधानों से किसी देश पर टैरिफ स्वतः लागू नहीं होता, बल्कि राष्ट्रपति को निर्धारित परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल करने का अधिकार मिलता है।

भारत और चीन पर क्यों बढ़ा टैरिफ का खतरा?

भारत रूस से कच्चे तेल के बड़े खरीदारों में शामिल है। नए कानून के कारण अमेरिकी प्रशासन के पास भारत समेत रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का वैधानिक रास्ता खुल गया है। रिपोर्टों के मुताबिक कानून में रूस की ऊर्जा खरीद से जुड़े प्रावधानों के तहत भारत और चीन जैसे देशों को प्रभावित करने की क्षमता है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कानून पारित होने का मतलब भारत पर तुरंत 100 प्रतिशत शुल्क लगना नहीं है। कानून राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है और आगे अमेरिकी प्रशासन की ओर से किसी विशेष टैरिफ को लागू करने का फैसला अलग से लिया जाना होगा।

भारत ने कहा- ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा करेंगे

अमेरिकी कांग्रेस में विधेयक पारित होने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के अनुसार, भारत बदलती बाजार परिस्थितियों और ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण के आधार पर अपनी जरूरतें पूरी करता रहेगा। भारत ने अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की प्रतिबद्धता भी जताई है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, रूस से भारत के तेल व्यापार के मुद्दे पर हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा हुई है। भारत ने अमेरिका के सामने यह भी रखा है कि इस मामले में उठाए जाने वाले कदमों का असर केवल दोनों देशों के संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

अब आगे क्या होगा, भारत पर कब लग सकता है 100% टैरिफ?

फिलहाल भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है। नए कानून ने अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसा कदम उठाने की शक्ति दी है। इसलिए वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रंप प्रशासन आगे किन देशों, वस्तुओं और परिस्थितियों पर टैरिफ लागू करने का फैसला करता है। भारतीय निर्यातकों के लिए भी अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि संभावित शुल्क की दर, प्रभावित उत्पादों और लागू होने की समयसीमा की पूरी तस्वीर अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों से स्पष्ट होगी।

यह कानून ऐसे समय आया है जब अमेरिका रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत के लिए चुनौती ऊर्जा सुरक्षा, रूस से तेल खरीद और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन से जुड़ी है। आगे अमेरिकी प्रशासन के फैसले यह तय करेंगे कि कानून का भारत-अमेरिका व्यापार और भारतीय ऊर्जा आयात पर वास्तविक असर कितना पड़ता है।


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