Share This Article रायपुर, 04 अक्टूबर 2026। ETrendingIndia / गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो गया है। गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद राज्य सरकार ने राजपत्र अधिसूचना भी जारी कर दी है और राज्य में कानून को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। मार्च 2026 में गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित किया था। यह विधेयक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों के लिए धर्म की परवाह किए बिना एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रावधान करता है। विधेयक के अनुसार कानून को प्रभावी करने की तारीख राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर तय करेगी। विवाह और उससे जुड़े कानूनी मामलों में कई महत्वपूर्ण बदलाव होंगे यूसीसी के लागू होने के बाद विवाह और उससे जुड़े कानूनी मामलों में कई महत्वपूर्ण बदलाव होंगे। इसमें विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है। इसी तरह लिव-इन रिलेशनशिप को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकृत कराना होगा। कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करना है। यूसीसी में उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों को लेकर बेटियों और बेटों के बीच समानता का प्रावधान किया गया है। यानी पैतृक और अन्य उत्तराधिकार संबंधी मामलों में बेटी को भी बेटे के समान अधिकार मिलेगा। बिना वसीयत के किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में उसके जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के अधिकार भी कानून के तहत निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा सरोगेसी और गोद लेने से जुड़े बच्चों को भी कानूनी अधिकारों के मामले में समान सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है। लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों के अधिकारों को भी कानून के तहत संरक्षित किया गया है। गुजरात यूसीसी में एकविवाह का नियम लागू गुजरात यूसीसी में एकविवाह का नियम लागू किया गया है। इसके तहत पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करने पर प्रतिबंध रहेगा। विवाह और तलाक से जुड़े मामलों के लिए भी एक समान कानूनी प्रक्रिया निर्धारित की गई है। यूसीसी की प्रमुख व्यवस्थाओं में लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण भी शामिल है। राज्य में ऐसे संबंधों को निर्धारित समय-सीमा और प्रक्रिया के तहत पंजीकृत कराना होगा। इससे संबंधित कानूनी अधिकारों और दायित्वों को भी कानून के तहत निर्धारित किया गया है। अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को इसके प्रावधानों से छूट गुजरात यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को इसके प्रावधानों से छूट दी गई है। इसके पीछे आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और वैवाहिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखना बताया गया है। गुजरात में UCC की दिशा में पहल 2022 में शुरू हुई गुजरात में यूसीसी की दिशा में पहल 2022 में शुरू हुई थी। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने की संभावनाओं पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की थी। इसके बाद फरवरी 2024 में गुजरात सरकार ने यूसीसी की जरूरत और उसके संभावित स्वरूप का अध्ययन करने के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की। समिति ने राज्य में व्यक्तिगत नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों का अध्ययन किया और यूसीसी के स्वरूप को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की। राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ गुजरात उत्तराखंड के बाद यूसीसी कानून को अपनाने वाला दूसरा राज्य मार्च 2026 में समिति की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे जाने के बाद विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया गया। गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को विधेयक पारित किया। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से भी विधेयक के पारित होने के बाद गुजरात सरकार और विधायकों को बधाई दी गई थी। राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ गुजरात उत्तराखंड के बाद यूसीसी कानून को अपनाने वाला दूसरा राज्य बन गया है। अब राज्य सरकार द्वारा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी अधिसूचनाओं और नियमों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। Share This Article Post navigation Sunday on Cycle 2026 : नशे के खिलाफ सूरत में 6 सितंबर को साइकिल रैली, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे नेतृत्व