Share This Article रायपुर 23 नवम्बर 2025/ ETrendingIndia / ‘Nilgiri’, ‘Bombilwadi’ and ‘Sikar’ shine at IFFI, film teams share their experiences / IFFI नीलगिरी बॉम्बिलवाड़ी सिका , भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में आज तीन अलग-अलग संवेदनाओं और शैलियों वाली फिल्मों—‘नीलगिरी: अ शेयर्ड वाइल्डरनेस’, ‘मुक्कम पोस्ट बॉम्बिलवाड़ी’ और ‘सिकार’—की टीमें एक साथ आईं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन फिल्मों के कलाकारों और निर्माताओं ने अपने-अपने अनुभव और कहानियां साझा कीं। ‘सिकार’: भावुक श्रद्धांजलि और असमिया सिनेमा की बड़ी छलांग प्रेस वार्ता की शुरुआत ‘सिकार’ के निर्देशक देबांगकर बोरगोहेन ने अपने मुख्य अभिनेता और मशहूर गायक ज़ुबीन गर्ग को याद करते हुए की। उन्होंने बताया कि ज़ुबीन गर्ग ने इस फिल्म में अभिनय का फैसला खुद लिया था, और यह उनके साथ रिलीज़ होने वाली आखिरी फिल्म है। ‘सिकार’ पहली असमिया फिल्म है जिसकी 70% शूटिंग लंदन में हुई। IFFI नीलगिरी बॉम्बिलवाड़ी सिका , देबांगकर ने बताया कि टीम के अधिकतर सदस्य यात्रा नहीं कर सके, इसलिए उन्होंने गुवाहाटी से ही ऑनलाइन लाइवस्ट्रीम के माध्यम से शूटिंग का निर्देशन किया। फिल्म को आईएफएफआई में शानदार प्रतिक्रिया मिली। उन्होंने कहा कि ओटीटी से पहुंच बढ़ती है, लेकिन क्षेत्रीय फिल्मों को अभी भी पर्याप्त पहचान नहीं मिल पाती। ‘नीलगिरी’: धैर्य, प्रकृति और सह-अस्तित्व की कहानी वन्यजीव वृत्तचित्र ‘नीलगिरी’ की टीम ने बताया कि फिल्म को शूट करने में अत्यधिक धैर्य की जरूरत पड़ी। सहयोगी निर्माता आदर्श एनसी ने बताया कि कई दुर्लभ दृश्यों को कैद करने में महीनों लग गए। फिल्म यह संदेश देती है कि इंसान और प्रकृति एक-दूसरे के साथ कैसे रहते हैं। टीम चाहती है कि दर्शक इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखें। ‘ मुक्कम पोस्ट बॉम्बिलवाड़ी’ इतिहास और हास्य का सुंदर मेलइस मराठी फिल्म के निर्देशक परेश मोकाशी और निर्माता भरत शितोले ने बताया कि यह कहानी 1942 के दौर में सेट है, जहां एक शांत गांव युद्ध और स्वतंत्रता आंदोलन के बीच फंस जाता है। उन्होंने कहा कि गंभीर विषयों में हास्य जोड़ने से संदेश और प्रभावशाली हो जाता है। ओटीटी के बारे में उनका कहना था कि क्षेत्रीय फिल्मों को पहले स्थानीय समर्थन चाहिए, तभी वे वैश्विक मंच तक पहुंच पाएंगी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने भारत की विविधता से भरी सिनेमाई दुनिया की एक झलक पेश की—कहीं प्रकृति की गूंज, कहीं इतिहास का व्यंग्य, और कहीं भावनाओं से भरा सफर। Share This Article Post navigation अनुपम खेर की मास्टर क्लास – “हार मानना कोई विकल्प नहीं” छः दशकों का चमकता सितारा : धर्मेंद्र की अद्भुत फिल्मी यात्रा