India-Russia: India in talks with Russian giant Rosneft... Eyeing Siberian rare-earth reserves.
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रायपुर, 21 जून 2026/ India-Russia: India in talks with Russian giant Rosneft… Eyeing Siberian rare-earth reserves.

India Russia : भारत और रूस मिलकर एक ऐसा बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं, जिससे पूरी दुनिया के बाजार में चीन का दबदबा कम हो जाएगा. भारत सरकार की कंपनी इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड रूस की मशहूर तेल कंपनी रोसनेफ्ट के साथ मिलकर साइबेरिया के जंगलों में छिपे एक विशाल खनिज खजाने पर काम करने के लिए गुप्त बातचीत कर रही है.

रूस ने भारत को अपने सबसे बड़े तोमतोर खनिज भंडार में हिस्सेदारी देने का ऑफर दिया है.

रूस के याकुतिया इलाके में स्थित तोमतोर भंडार दुनिया का सबसे बड़ा और अनोखा खनिज क्षेत्र माना जाता है. यहाँ रेयर अर्थ एलिमेंट्स यानी दुर्लभ खनिज भारी मात्रा में मौजूद हैं.

ये ऐसे खनिज हैं जो आज की आधुनिक दुनिया को चलाने के लिए सबसे जरूरी हैं. लेकिन अभी तक इस जगह से खुदाई शुरू नहीं हुई है.

साल 2025 में रूस सरकार ने इसकी जिम्मेदारी अपनी सबसे बड़ी कंपनियों में से एक, रोसनेफ्ट को सौंपी थी, जिसकी कुल कीमत 4 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा है.

आज पूरी दुनिया में इन खास खनिजों के बाजार पर चीन का कब्जा है. मोबाइल फोन, कंप्यूटर, मिसाइल और सबसे खास तौर पर इलेक्ट्रिक गाडिय़ों की मोटर बनाने के लिए ये खनिज बहुत जरूरी हैं.

चीन अक्सर दूसरे देशों को दबाने के लिए इन खनिजों के एक्सपोर्ट पर रोक लगा देता है. भारत अपनी फैक्ट्रियों को चीन के इस खतरे से बचाने के लिए रूस के साथ यह सौदा कर रहा है.

समझौते के मुताबिक, रूस के इस तोमतोर भंडार से कच्चे पत्थरों और खनिजों को निकाला जाएगा. रूस में ही इसकी पहली सफाई (प्रारंभिक प्रोसेसिंग) की जाएगी. इसके बाद इन सैंपल्स को भारत भेजा जाएगा, जहाँ भारतीय वैज्ञानिक और एक्सपर्ट्स इसकी बारीकी से जांच करेंगे. जांच सफल होने पर दोनों देश मिलकर बड़े पैमाने पर काम शुरू करेंगे.

भारत सरकार देश के अंदर ही इन खनिजों से हाई-टेक मैग्नेट (चुंबक) बनाने के लिए करीब 6,500 करोड़ रुपये ($771 मिलियन) की एक बड़ी योजना पर काम कर रही है.

इसके साथ ही भारतीय कंपनियां केवल रूस ही नहीं, बल्कि अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के मलावी जैसे देशों में भी नए खदानों की तलाश कर रही हैं ताकि भारत को कभी भी कच्चे माल की कमी न हो.

अगर यह बातचीत पूरी तरह सफल रहती है, तो आने वाले समय में भारत दुनिया के टेक बाजार में एक बड़ी महाशक्ति बनकर उभरेगा.