Share This Article रायपुर, 29 सितंबर 2026 / ETrendingIndia / विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़ी चुनौतियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े मतभेदों के अलावा सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दे भी द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करते हैं। भारत-अमेरिका के बीच व्यापार और रणनीतिक सहयोग व्यापक है, लेकिन व्यापार नीति से जुड़े मतभेदों पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रही है। जयशंकर ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि भारत का एक पड़ोसी लंबे समय से आतंकवाद को अपनी नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह केवल कूटनीतिक विषय नहीं, बल्कि सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। विदेश मंत्री के अनुसार, जब किसी देश के लिए कोई मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण हो और उसका सहयोगी उस चिंता को उसी गंभीरता से न देखे, तो इसका असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ सकता है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। जयशंकर की टिप्पणी को इसी व्यापक सुरक्षा संदर्भ में देखा जा रहा है। एशिया सोसाइटी के विश्लेषणों में भी भारत-अमेरिका संबंधों पर व्यापार, पाकिस्तान और व्यापक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के प्रभाव का उल्लेख किया गया है। भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार और शुल्क नीति भी महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत के साथ-साथ अमेरिकी शुल्क नीति और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। एशिया सोसाइटी के जून 2026 के विश्लेषण के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच व्यापार वार्ता में कृषि, ऊर्जा, वाहन और प्रौद्योगिकी समेत कई क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे शामिल रहे हैं।जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई बातचीत में भी व्यापार, शुल्क और अन्य द्विपक्षीय विषयों पर चर्चा हुई है। भारत के विदेश मंत्रालय से संबद्ध व्यापार पोर्टल के अनुसार, दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापार एवं निवेश संबंध हैं और विभिन्न क्षेत्रों में वाणिज्यिक सहयोग जारी है। एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया आसान दौर से नहीं गुजर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की सबसे बड़ी वजह देशों के बीच शक्ति संतुलन में हो रहा बदलाव है। उनके अनुसार, यह बदलाव ऐसे चरण में पहुंच गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। विदेश मंत्री ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियां नई सोच और नए तालमेल की चुनौती पैदा कर रही हैं तथा विभिन्न देशों की राजनीति को भी प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने शक्ति संतुलन में बदलाव को वर्तमान समय का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और बदलती वैश्विक वास्तविकताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपने अस्तित्व के नौवें दशक में है। ऐसे में सवाल यह है कि करीब 81 वर्ष पहले 51 सदस्य देशों और उस समय की अलग वैश्विक शक्ति संरचना के बीच स्थापित संयुक्त राष्ट्र क्या उसी स्वरूप में बना रहेगा या बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप स्वयं को ढालेगा। विदेश मंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के अनुरूप बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। भारत-अमेरिका संबंधों में रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद भी बने हुए हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच संवाद जारी है। Share This Article Post navigation Indian Railway News : बारबिल-बोलानीखदान रेल सेक्शन के दोहरीकरण को मंजूरी, ₹122 करोड़ होंगे खर्च, माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी