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रायपुर, 30 सितंबर 2026 / ETrendingIndia / देश में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में दोषसिद्धि की दर बेहद कम बनी हुई है। पिछले पांच वर्षों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने 8.86 लाख खाद्य नमूनों की जांच की, जिनमें करीब 1.86 लाख नमूने मिलावटी या तय मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इनमें से सिर्फ 6,203 मामलों यानी 3.3 प्रतिशत में दोषसिद्धि हुई, जबकि करीब 75 प्रतिशत मामलों में आर्थिक जुर्माना लगाया गया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यसभा में स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव के लिखित जवाब में 2021-22 से 2025-26 तक के आंकड़े साझा किए।

1.85 लाख मामलों में कार्रवाई

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पांच वर्षों में 1,85,780 खाद्य नमूनों में मिलावट या मानकों का उल्लंघन पाया गया। इनमें 1,39,507 मामलों में जुर्माना लगाया गया, जबकि 6,203 मामलों में दोषसिद्धि हुई।

2025-26 में बढ़ी दोषसिद्धि दर

2021-22 में 32,935 उल्लंघन मामलों में 671 दोषसिद्धियां हुईं और 19,437 मामलों में जुर्माना लगाया गया। 2022-23 में 44,626 मामलों में 1,188 दोषसिद्धियां हुईं।
2024-25 में 34,388 मामलों में 1,265 दोषसिद्धियां हुईं। वहीं 2025-26 में 40,023 मामलों में 1,918 दोषसिद्धियां हुईं, जिससे दोषसिद्धि दर बढ़कर करीब 4.8 प्रतिशत हो गई। इस साल 31,878 मामलों में जुर्माना लगाया गया।

गंभीर मामलों में आपराधिक कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत खाद्य पदार्थों को असुरक्षित, घटिया गुणवत्ता वाला या गलत लेबल वाला पाए जाने पर कार्रवाई का प्रावधान है। उल्लंघन की गंभीरता और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर जुर्माना या आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि 2025-26 के आंकड़े शुरुआती हैं और प्रयोगशाला रिपोर्ट तथा अदालतों में मामलों के अंतिम निपटारे के बाद इनमें बदलाव संभव है।


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