रायपुर / ETrendingIndia / भारतीय छात्रों का रुख यूके की ओर , ट्रम्प की वीज़ा नीतियों से बदला भारतीय छात्रों का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नई वीज़ा पाबंदियों के बाद अब भारतीय छात्रों का रुख यूके की ओर बढ़ रहा है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर द्वारा भारतीय टैलेंट के लिए खुले अवसरों की घोषणा ने छात्रों में नई उम्मीदें जगाई हैं।
STEM और टेक कोर्सेज की बढ़ी मांग
अमेरिका लंबे समय से STEM पाठ्यक्रमों का केंद्र रहा है, लेकिन अब यूके विश्वविद्यालयों में आवेदन तेज़ी से बढ़े हैं। कोलेगिफ़ाई के अनुसार, दस में से छह छात्र अब डेटा साइंस, एआई, रोबोटिक्स और हेल्थ एनालिटिक्स जैसे कोर्स चुन रहे हैं। पहले जो छात्र अमेरिका की सेकंड-टियर यूनिवर्सिटीज़ को लक्ष्य बना रहे थे, अब वे इम्पीरियल, वॉरिक, मैनचेस्टर और बाथ जैसे प्रमुख यूके संस्थानों की ओर झुक रहे हैं।
भारतीय शहरों से बढ़ी वैश्विक शिक्षा की दिलचस्पी
यूनिवर्सिटी लिविंग के संस्थापक सौरभ अरोड़ा ने बताया कि भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों से विदेशी शिक्षा की मांग लगातार बढ़ रही है। वहीं आईडीपी एजुकेशन के क्षेत्रीय निदेशक पियूष कुमार ने कहा कि छोटे, गहन एमएससी प्रोग्राम लोकप्रिय हो रहे हैं क्योंकि वे छात्रों को जल्दी रोजगार के अवसर देते हैं।
भारतीय छात्रों के लिए नए अवसरों का दौर
यूके की इमिग्रेशन रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 तक 98,000 से अधिक भारतीय छात्रों को अध्ययन वीज़ा मिले हैं, जिससे वे दुनिया में दूसरे सबसे बड़े समूह बन गए हैं।
भारत में खुलेगी ब्रिटिश विश्वविद्यालयों की नई शाखाएँ
प्रधानमंत्री स्टारमर की यात्रा के दौरान यूनिवर्सिटी ऑफ लैंकेस्टर और यूनिवर्सिटी ऑफ सरे को भारत में कैंपस खोलने की मंज़ूरी मिली है। इसके अलावा, साउथैम्पटन, यॉर्क, एबरडीन, ब्रिस्टल, लिवरपूल, बेलफास्ट और कोवेंट्री विश्वविद्यालय अगले साल से अपने कैंपस खोलेंगे।
भारतीय टैलेंट के लिए खुला यूके का द्वार
एथेना एजुकेशन के संस्थापक राहुल सुब्रमण्यम के अनुसार, ब्रिटेन का यह कदम भारतीय छात्रों के लिए नए अवसर खोलेगा। ग्रेजुएट रूट वीज़ा के तहत छात्र अपनी पढ़ाई के बाद दो साल तक यूके में काम कर सकेंगे, जिससे उनकी रोजगार संभावनाएँ और बढ़ेंगी।
