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रायपुर / ETrendingIndia / श्रीहरिकोटा से हुआ ऐतिहासिक प्रक्षेपण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार को देश का सबसे भारी संचार उपग्रह जीसैट-7आर (CMS-03) सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह लॉन्च आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से शाम 5:26 बजे हुआ। एलवीएम3-एम5 (बाहुबली) रॉकेट ने उपग्रह को सटीक कक्षा में स्थापित किया।

भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह देगा नौसेना को नई ताकत

4,410 किलोग्राम वजनी यह मल्टी-बैंड उपग्रह भारत और आस-पास के समुद्री क्षेत्रों में संचार सेवाएं प्रदान करेगा। यह उपग्रह 15 वर्षों तक काम करने में सक्षम है। इसके माध्यम से भारतीय नौसेना की अंतरिक्ष-आधारित संचार और समुद्री निगरानी क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इसरो प्रमुख बोले – ‘आत्मनिर्भर भारत’ की चमकदार मिसाल

इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि “CMS-03 आत्मनिर्भर भारत की एक चमकदार मिसाल है।” उन्होंने बताया कि यह उपग्रह कई अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है और पूरी तरह देश में विकसित किया गया है। कठिन मौसम परिस्थितियों के बावजूद इसरो टीम ने मिशन को सफल बनाया।

उन्होंने बताया कि इस मिशन के दौरान स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन C-25 पर इन-फ्लाइट प्रयोग भी सफलतापूर्वक किया गया, जो भविष्य में एक ही रॉकेट से कई उपग्रहों के प्रक्षेपण का मार्ग प्रशस्त करेगा।

अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और कदम

इसरो के अनुसार, LVM3-M5 रॉकेट ने 4,410 किलोग्राम का रिकॉर्ड पेलोड उठाया, जो इसके सामान्य क्षमता (4,000 किग्रा) से अधिक है। यह इसरो की तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भरता का प्रमाण है। सभी आठ LVM3 लॉन्च अब तक 100% सफल रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सशक्त कदम

CMS-03 का प्रक्षेपण न केवल भारत की नौसेना संचार प्रणाली को आधुनिक बनाएगा बल्कि देश की रक्षा और रणनीतिक क्षमताओं को भी मजबूत करेगा। अंततः, यह उपलब्धि भारत को वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाती है।