Share This Article रायपुर, 18 अगस्त 2026 / ETrendingIndia / भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की 97वीं वार्षिक आम बैठक में कृषि क्षेत्र को अधिक किसान-केंद्रित, तकनीक आधारित और बाजारोन्मुख बनाने का रोडमैप सामने आया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य कृषि क्षेत्र को मजबूत किए बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने मांग-आधारित अनुसंधान, छोटे किसानों की आय बढ़ाने, तकनीक को तेजी से खेतों तक पहुंचाने और कृषि निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया। किसान की जरूरत के हिसाब से होगा अनुसंधान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि अनुसंधान का केंद्र किसान, बाजार और उपभोक्ता की वास्तविक जरूरतें होनी चाहिए। शोध का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उसका लाभ किसान तक कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचा। एकीकृत खेती से छोटे किसानों की आय में विविधता उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली को लघु और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने की महत्वपूर्ण कुंजी बताया। इसमें फसल के साथ पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ा जाता है। इससे लागत घटाने और सालभर आय के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है। प्रयोगशाला से खेत तक तेजी से पहुंचे तकनीक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के लिए ICAR और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि नवाचार केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहे, बल्कि उसे व्यावहारिक समाधान में बदलकर खेतों तक पहुंचाना जरूरी है। 386 नई फसल किस्में विकसित ICAR के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने बताया कि पिछले वर्षों में 386 नई फसल किस्में जारी की गईं। इनमें करीब 94% जलवायु-प्रतिरोधी और 29% जैव-संवर्धित किस्में हैं। इससे उत्पादकता, पोषण सुरक्षा और बदलती जलवायु से निपटने में मदद मिलेगी। कृषि अनुसंधान में तकनीक और नवाचार पर जोर जीनोमिक्स, जीनोम एडिटिंग, पशुधन स्वास्थ्य, मत्स्य पालन, मृदा स्वास्थ्य और प्राकृतिक खेती जैसे क्षेत्रों में भी प्रगति दर्ज की गई। स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर टीके को पशुधन और किसानों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। 805 IP आवेदन, 36 संस्थानों में व्यावसायीकरण ICAR ने पिछले वर्ष करीब 805 बौद्धिक संपदा (IP) आवेदन दाखिल किए। वहीं 36 संस्थानों में तकनीक के व्यावसायीकरण को मजबूत किया गया, ताकि अनुसंधान को बाजार और किसानों के लिए उपयोगी उत्पादों में बदला जा सके। कृषि निर्यात बढ़ाने पर भी फोकस गुणवत्ता, पोषण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, उत्पाद की शेल्फ लाइफ और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इससे भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक बाजार में पहचान और निर्यात क्षमता मजबूत करने का लक्ष्य है।संदेश साफ है—कृषि अनुसंधान अब केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहेगा। किसान की जरूरत, खेत की समस्या और बाजार की मांग के आधार पर शोध को जमीन पर उतारकर किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा। Share This Article Post navigation सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा पर रोक लगाने से इनकार किया, पर सजा-ए-मौत के विकल्पों पर विचार करने को कहा