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रायपुर 19 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / कुबेरेश्वरधाम महादेव कथा , गुरु केवल मार्ग नहीं दिखाते, वे वह दृष्टि देते हैं जिससे हम ईश्वर को देख सकें। मां शबरी का अपने गुरु मतंग ऋषि के प्रति अटूट विश्वास ही था, जिसने राम को उनकी कुटिया तक खींच लाया।

श्रवण, सत्संग और जप का प्रभाव क्या होता है, माता शबरी को भगवान श्रीराम ने बताया था, श्रीराम ने माता शबरी से कहा कि मैं परीक्षा से नहीं मिलता मैं तो भरोसा और प्रतीक्षा से प्राप्त होता हूं।

कहा जाता है कि जब ऋषि मतंग मृत्यु के निकट थे, तब वृद्धावस्था पा चुकीं शबरी ने उनसे पूछा कि आप जैसा ज्ञान, वैराग्य और प्रभु के दर्शन मुझे कैसे प्राप्त होंगे। ऋषि मतंग ने देह त्यागने से ठीक पहले उन्हें वरदान दिया कि नि:स्वार्थ सेवा के लिए तुम्हें न केवल प्रभु के दर्शन मिलेंगे, बल्कि भगवान राम खुद चलकर तुम्हारे पास आएंगे। तब से शबरी भगवान राम के आगमन की प्रतीक्षा में लग गयी थीं। उसके उपरांत उसकी मनोकामना पूरी हुई।

उक्त विचार मध्य प्रदेश के जिला मुख्यालय सीहोर के समीपस्थ कुबेरेश्वरधाम पर जारी सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव के छठवे दिवस अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे।

देर रात्रि को समिति की ओर से पंडित समीर शुक्ला, पंडित विनय मिश्रा सहित अन्य ने बाबा का पांच क्विंटल से अधिक फूलों से विशेष श्रृंगार किया था, वहीं गुरुवार को फुलेरा दूज के मौके पर यहां पर करीब पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने धाम पर दर्शन किए।

रुद्राक्ष महोत्सव : फुलेरा दूज पर कुबेरेश्वरधाम में भक्तों का सैलाब, पांच क्विंटल फूलों से हुआ श्रृंगार
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि फुलेरा दूज के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल और धतूरा अर्पित किया। मध्य रात्रि से ही श्रद्धालु धाम पर पहुंचने लगे थे और भजन-कीर्तन में लीन रहे।

पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने प्रवचन में कहा-अगर हमारे पास धन, समय और वस्तुएं हैं तो जरूरतमंदों की मदद करने में पीछे नहीं हटना चाहिए। परोपकार सबसे बड़ा पुण्य है।

व्यासपीठ पर पहुंचे कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहाकि कुबेरेश्वरधाम पर स्वयं महादेव विराजमान है, यहां पर भक्ति का महासागर उमड़ रहा है। पंडित श्री मिश्रा की सरलता, दिव्यता और भव्यता उनके कर्म, आचरण और स्वभाव में झलकती है। उनके पुत्र पंडित राघव मिश्रा भी उनकी तरह विनम्र है। मैं कामना करता हूं कि जो नाम पंडित श्री मिश्रा ने दुनिया में स्थापित किया उससे अधिक उनके पुत्र की कीर्ति बढे।

कथा वाचक देवकीनंदन महाराज ने सनातन बोर्ड की मांग उठाते हुए सभी को इसके लिए जुट जाने और काम करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि दूसरे मजहबों के कई देश हैं, जिनमें सब एक हैं लेकिन हिंदुओं का एक देश है, उसमें भी हिंदू बंटे हुए हैं।

सनातन धर्म संसद

अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा के दौरान व्यास पीठ का आशीर्वाद लेने पहुंचे प्रसिद्ध कथावाचक हमारे देवकीनंदन ठाकुर महाराज सनातन धर्म के पुनर्जागरण, संस्कृति संरक्षण और युवाओं को भारतीय परंपराओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्यरत हैं। वे भागवत कथाओं के माध्यम से धर्म, संस्कार और राष्ट्र प्रेम का संदेश देते हैं, साथ ही सनातन प्रीमियम लीग और सनातन धर्म संसद जैसी पहलों के जरिए युवाओं को धर्म से जोड़ रहे हैं।

विशिष्ट अतिथियों का आगमन

कथा के छठवें दिन उज्जैन से पधारे श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर स्वामी रंगनाथ जी महाराज और प्रख्यात कथावाचक पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज का भव्य स्वागत किया गया। स्वामी रंगनाथ जी ने गौ-सेवा और गौ-अभिवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया, वहीं देवकीनंदन ठाकुर जी ने ‘सनातन बोर्डÓ की मांग और ‘सनातन प्रीमियर लीगÓ (स्क्करु) के माध्यम से युवाओं को धर्म से जोड़ने की पहल की सराहना की।

पंडित श्री मिश्रा ने भक्तों से आह्वान किया कि कल कथा का अंतिम दिन है, अत: आज की रात पूर्णत: शिव के ध्यान में व्यतीत करें।