rail services
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रायपुर 9 अप्रैल 2026/ ETrendingIndia / Madhya Pradesh: unprecedented expansion in rail services in the last two years, the length of railway track increased to 5,200 km, becomes the fourth largest railway network in the country / मध्यप्रदेश रेलवे विस्तार , मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अथक प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। मध्यप्रदेश ‘डबल इंजन सरकार’ का एक शानदार उदाहरण बनकर उभरा है। अब प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है और रेल कनेक्टिविटी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाले शीर्ष दस राज्यों में से एक है।

रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर 5,200 किलोमीटर हो गई है, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का 7.6% है।

बेहतर रेल सेवाओं के माध्यम से देश के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है।

मध्यप्रदेश के लिए आवंटित रेलवे बजट में 24 गुना वृद्धि हुई है। इस वर्ष 15,188 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो एक रिकॉर्ड है।

पिछले वर्ष यह राशि 14,745 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2009 से 2014 तक, वार्षिक बजट केवल 632 करोड़ रुपये था। वर्तमान में 1,18,379 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न रेल परियोजनाएँ अलग-अलग चरणों में चल रही हैं।

कई प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी

केंद्र सरकार ने कई प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है.

जबलपुर-गोंदिया रेलवे लाइन और इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन के दोहरीकरण, तथा सिंहस्थ कुंभ मेला : 2028 के संदर्भ में अन्य अधोसंरचना विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

रेल लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण

बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य में रेल लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है।

74 स्टेशनों को किया जा रहा है अपग्रेड

अमृत भारत स्टेशन योजना में छह स्टेशनों – कटनी दक्षिण, नर्मदापुरम, ओरछा, सिवनी, शाजापुर और श्रीधाम – पर पुनर्विकास का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा, पूरे राज्य में 74 स्टेशनों को अपग्रेड किया जा रहा है। यात्रियों के लिये 3,163 करोड़ रुपये की आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जा रही है।

वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों के लिए वरदान साबित हुई हैं। इनमें भोपाल-नई दिल्ली, इंदौर-नागपुर, भोपाल-रीवा और खजुराहो-बनारस शामिल हैं।

इंदौर और भोपाल में मेट्रो ट्रेन

इंदौर और भोपाल में 2 मेट्रो ट्रेनें चल रही हैं.रायसेन ज़िले के उमरिया गाँव में 1800 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रेल कोच निर्माण इकाई बनाई जा रही है। इससे 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा।

बड़े राज्यों में सीधा संपर्क

जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण से महाकौशल क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। इससे पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में 5,200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया गया है।

इससे जबलपुर सहित मण्डला, सिवनी और बालाघाट जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।

व्यापार-व्यवसाय और पर्यटन क्षेत्र का विस्तार होगा। कोयला, इस्पात, सीमेंट, खाद्यान्न और उर्वरक के परिवहन में तेजी आयेगी। उद्योगों के लिये मजबूत सप्लाई चेन बनेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन 18,036 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत से बनाई जा रही है। इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन धार, खरगौन और बड़वानी जिलों को सीधा लाभ होगा।

3 नई ट्रेनें शुरू

उज्जैन और ओंकारेंश्वर जैसे धार्मिक महत्व के शहरों से सम्पर्क बढ़ेगा। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, 3 नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। रीवा से पुणे (जबलपुर और सतना होते हुए), जबलपुर से रायपुर (नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया होते हुए), और ग्वालियर से बेंगलुरु (गुना और भोपाल होते हुए)।

मुंबई और इंदौर के बीच नई रेलवे लाइन को मंज़ूरी

केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 2 बड़े कमर्शियल हब-मुंबई और इंदौर – के बीच 309 किलोमीटर लंबी एक नई रेलवे लाइन को भी मंज़ूरी दी है। इन कमर्शियल केंद्रों को जोड़ने के अलावा, यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के उन क्षेत्रों को भी जोड़ेगा जहाँ अभी रेलवे कनेक्टिविटी नहीं है। यह रेलवे लाइन महाराष्ट्र के 2 ज़िलों और मध्यप्रदेश के 4 ज़िलों से होकर गुज़रेगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 18,036 करोड़ रुपये है, और यह 2028-29 तक पूरा हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है .

यह परियोजना महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को कवर करेगी। इसमें 30 नए स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे बड़वानी जैसा आकांक्षी जिला भी रेलवे कनेक्टिविटी से लाभान्वित होगा। लगभग 1,000 गांवों और लगभग 30 लाख लोगों को रेलवे कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी। यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू पोर्ट गेटवे पोर्ट और अन्य बंदरगाहों को पीथमपुर ऑटो क्लस्टर औद्योगिक केंद्र से भी जोड़ेगी। यह परियोजना मध्यप्रदेश के बाजरा उत्पादक जिलों को महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक जिलों से जोड़ेगी.

भोपाल-रामगंज मंडी रेललाइन

भोपाल-रामगंज मंडी रेललाइन से राजगढ़ और भोपाल का सीधा संपर्क राजस्थान में हो जायेगा। इस 276 किमी लाइन में से 169 किमी पर काम पूरा हो गया है। इटारसी-भोपाल-बीना और इटारसी-नागपुर चौथी रेललाइन को मंजूरी मिल चुकी है।

वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहां 145 कि.मी. नई रेल पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 29 कि.मी. प्रति वर्ष रहा वहीं 2014 से 2025 तक, 2,651 कि.मी. नई पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 241 कि.मी. प्रति वर्ष रहा, जो कि लगभग 8 गुना ज़्यादा है।

वर्तमान में, 4,740 किमी के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनकी अनुमानित लागत 89,543 करोड़ रूपये है। ये प्रोजेक्ट्स विकास के अलग-अलग चरणों में हैं। अब तक 2,092 किमी पर काम पूरा हो चुका है, जिस पर 41,401 करोड़ रूपये खर्च हुए हैं।